भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई के राष्ट्रीय सचिव सौरभ सिकंदर और पश्चिम बंगाल यूथ विंग के अध्यक्ष देबजीत सरकार का कहना है, तृणमूल कांग्रेस सरकार असम से आने वाले लोगों को अपने यहां बसाने की पूरी तैयारी कर रही है। अलीपुर द्वार एक ऐसा ही इलाका है। बाढ़ पीड़ितों के लिए यहां शेल्टर लगता था। पिछले चार साल से बाढ़ नहीं आई है, इसके बावजूद इसे दोबारा से तैयार कराया जा रहा है। इसी तरह से कई और भी इलाके हैं, जहां असम से आने वालों को ठहराया जाएगा। देबजीत के मुताबिक, बारासात, दक्षिण 24 परगना, बाहरूइपुर, वीरभूमि और पुरलिया में भी शिविर बन रहे हैं। जहां-जहां पर नए कैंप बन रहे हैं, वहां पंचायती राज संस्थाओं पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। यही वजह है कि सरकार को बाहर से आने वाले लोगों को यहां बसाने में किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
10-12 साल पहले आकर बसे हैं ये लोग
असम में तैनात एक सिविल अधिकारी का कहना है कि यहां से अभी जो लोग निकल रहे हैं, उनके पास किसी भी तरह का कोई दस्तावेज नहीं है। इनमें अधिकांश वे लोग हैं, जो पिछले दस-बारह साल पहले ही घुसपैठ के जरिए भारत आए थे। इन्होंने बांग्लादेश से बिना किसी दिक्कत के पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर लिया था। इसके बाद वे कामकाज की वजह से असम में जाकर बस गए। अब ये लोग जानते हैं कि दस्तावेजों के अभाव में ये किसी भी कोर्ट या दूसरी संस्था के सामने अपना पक्ष नहीं रख सकेंगे।
इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं हैं तृणमूल कांग्रेस के सांसद
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं है। पार्टी का पक्ष जानने के लिए लोकसभा सांसद सुब्रता बक्शी, दीबेयंदु और शेखर राय से बातचीत की गई, लेकिन उन्होंने पार्टी प्रवक्ता से बात करने का आग्रह किया। इस बाबत पार्टी प्रवक्ता को एसएमएस किया गया तो उन्होंने अपने जवाब में लिखा, प्लीज बंगाल सरकार से चेक कर लें।