भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएसवी तारिणी अपने ऐतिहासिक ट्रांसओशनिक अभियान में विजयी होकर वापस लौट आया है। यह अभियान लगभग दो महीने चल चला। भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए द्वारा इस अभियान को डबल हैंडेड मोड में संचालित किया गया। इसके साथ ही ये दोनों लेफ्टिनेंट कमांडर ऐसा अभियान पूरा करने वालीं भारत की पहली महिला अफसर बनीं हैं।
22 दिन तक झेली समुद्र की चुनौतियां
इस अभियान के दौरान दोनों अफसरों को भयानक समुद्री तूफानों और लहरों की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भारतीय नौसेना ने अपने बयान में बताया कि अब ये दोनों अफसर अपने अगले अभियान की तैयारी कर रहीं हैं। अगले अभियान का नाम सागर परिक्रमा होगा, जिसे सितंबर में आईएनएसवी तारिणी की मदद से अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
28 फरवरी से 21 मार्च तक चला ऐतिहासिक अभियान
भारतीय नौसेना ने कहा कि 28 फरवरी को आईएनएसवी तारिणी ने समुद्री क्षेत्र में 'नारी शक्ति' का प्रदर्शन करते हुए गोवा से मॉरीशस के पोर्ट लुइस तक अभियान शुरू किया था। 22 दिन तक हिंद महासागर की अकल्पनीय परिस्थितियों को झेलने के बाद 21 मार्च के दिन आईएनएसवी तारिणी मॉरिशस के सेंट लुइस पहुंचा। वहां मॉरिशस कोस्ट गार्ड और भारतीय राजदूत द्वारा उस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया गया था। इसके बाद भारत और मॉरिशस कोस्ट गार्ड के बीच समुद्र में मजबूत संबंध बढ़ाने के लिए छोटा सा अभ्यास सत्र चलाया गया। 30 मार्च के दिन भारतीय दल ने मॉरिशस से वापस लौटने के लिए अभियान शुरू किया। भारतीय नौसेना ने कहा कि दोनों अफसरों द्वारा समुद्र में तेज हवाओं और मुश्किल हालातों का सामना किया गया। कभी हार न मानने वाली जिद और चुनौतियों का सामना करने बाद आईएनएवी तारिणी सुरक्षित गोवा लौट आया।
समुद्र में ‘नारी शक्ति’ का अभूतपूर्व प्रदर्शन
भारतीय नौसेना के अनुसार यह अभियान साबित करता है कि समुद्र में नारी शक्ति भी अपना प्रभुत्व स्थापित कर रही है। नौसेना ने कहा कि आईएनएसवी तारिणी ने समुद्री क्षेत्र में 'नारी शक्ति' का प्रदर्शन किया है और इससे देश की महिलाओं को भारतीय नौसेना के साथ काम करने की प्रेरणा मिलेगी।