हिंदी विवाद पर जमकर बरसे योगी
योगी आदित्यनाथ ने तीन भाषाओं के विवाद को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आलोचना की। उन्होंने इसे संकीर्ण राजनीति बताया। सीएम योगी ने कहा कि स्टालिन क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका वोट बैंक खतरे में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए, न कि विभाजित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि तमिल भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है, जिसका इतिहास और विरासत समृद्ध है। आदित्यनाथ ने सवाल उठाया कि हिंदी से नफरत क्यों की जानी चाहिए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर भाषा सीखना जरूरी है।
'हमें हिंदी से क्यों नफरत करनी चाहिए?'
मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा, 'देश को भाषा या क्षेत्र के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। हम प्रधानमंत्री मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने वाराणसी में काशी-तमिल संगम की तीसरी पीढ़ी का आयोजन किया। तमिल भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है और इसका इतिहास संस्कृत जितना ही पुराना है। तमिल के प्रति हर भारतीय का आदर और सम्मान है, क्योंकि इस भाषा में भारतीय विरासत के कई तत्व आज भी जीवित हैं। तो फिर हमें हिंदी से क्यों नफरत करनी चाहिए?'
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'उत्तर प्रदेश में तमिल, तेलुगु और अन्य भाषाएं पढ़ाई जा रहीं'
उन्होंने यह भी कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में तमिल, तेलुगु और अन्य भाषाएं पढ़ाई जा सकती हैं, तो तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों में हिंदी क्यों नहीं पढ़ाई जा सकती? मैं कहता हूं कि हमें हर भाषा सीखनी चाहिए। हम उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम पढ़ाते हैं। हम न केवल इन्हें पढ़ा रहे हैं, बल्कि हम उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाएं भी पढ़ा रहे हैं। यह सब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लागू किया गया है। अगर हम उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी और अन्य भाषाएं पढ़ा सकते हैं, तो तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाने में क्या गलत है? मेरा मानना है कि हमें देश के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के सीएम ने कहा।
परिसीमन को लेकर स्टालिन की चिंताओं को खारिज किया
भाषा विवाद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच गतिरोध पैदा कर दिया है। आदित्यनाथ ने परिसीमन को लेकर स्टालिन की चिंताओं को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक एजेंडा बताया। उन्होंने कहा, 'देखिए, गृह मंत्री ने इस मामले पर बहुत स्पष्ट रूप से कहा है। बैठक की आड़ में यह स्टालिन का राजनीतिक एजेंडा है। मेरा मानना है कि गृह मंत्री के बयान के बाद इस मुद्दे पर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए।'