इंदिरा गांधी कड़े फैसलों को लेकर जितनी चर्चा में रहीं, उससे ज्यादा लोकप्रिय बनाया उन्हें 'गरीबी हटाओ' के नारे ने। उनके इस नारे पर मौजूदा एनडीए सरकार समेत कई राजनीतिक पार्टियां चुटकी लेती रहीं। इंदिरा गांधी ने 1971 के चुनाव में ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था। कहा जाता है कि उन्होंने इस नारे को चुनाव में खूब भुनाया।
'‘वो कहते हैं इंदिरा हटाओ, हम कहते हैं गरीबी हटाओ’' यही वह लाइन थी, जिसके जरिए चुनाव प्रचार में उन्होंने लोगों की हमदर्दी बटोरी। वहीं, विरोधियों ने गरीबी हटाओ के जवाब में नारा दिया, ‘देखो इंदिरा का ये खेल, खा गई राशन, पी गई तेल’। हालांकि विरोधी पार्टियों के जवाबी नारे पर इंदिरा का गरीब हटाओ का नारा भारी पड़ा।
पांचवीं लोकसभा चुनाव के नतीजे आए तो कांग्रेस ने देश में दो तिहाई सीटें हासिल कर ली। कांग्रेस को तब 518 में से 352 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस केे लिए यह ऐतिहासिक जीत थी।
चुनाव के बाद कुछ हद तक इंदिरा ने किए थे सुधार
इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के चार साल बाद 1975 में एक 20 सूत्रीय कार्यक्रम पेश किया, जिसका लक्ष्य गरीबी पर हमला था। जानकार बताते हैं कि 1971 में गरीबी की दर 57 प्रतिशत थी। इंदिरा ने गरीबी हटाओ का नारा देकर कई योजनाएं शुरू की।
1973 में श्रीमान कृषक एवं खेतिहर मजदूर एजेंसी व लघु कृषक विकास एजेंसी तथा 1975 में गरीबी उन्मूलन के लिए 20 सूत्रीय कार्यक्रम लागू किए। ये गांव के लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और गरीबी घटाने के लिए प्रभावशाली साबित हुए।
1977 में गरीबी दर 52 प्रतिशत और 1983 में 44 प्रतिशत हो गई। इसके बाद यह 1987 में 38.9 फीसदी तक आ गई। मौजूदा समय में गरीबी की दर लगभग 27.5 फीसदी जरूर है, लेकिन गरीब नहीं घटे।
नोटबंदी पर एक बार फिर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की(सांकेतिक तस्वीर)
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अमेरिकी शोध संस्था ब्रूकिंग्स की रिपोर्ट-फ्यूचर डेवलपमेंट के अनुसार मोदी सरकार में हर मिनट 44 लोग गरीबी रेखा से उपर निकल रहे हैं। ब्रूकिंग्स की इस रिपोर्ट के अनुसार 2022 तक 3 फीसदी से भी कम लोग गरीब रह जाएंगे, जबकि 2030 तक गरीबी रेखा से नीचे न के बराबर लोग बचेंगे।
इन रिपोर्टों से इतर नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के प्रोफेसर एनआर भानुमूर्ति के अनुसार 2030 तक गरीबी खत्म करने के लिए भारत की विकास दर 7-8 फीसदी बनाए रखनी होगी। भानुमूर्ति साल 1991 में हुए आर्थिक सुधारों के प्रयासों की भी सराहना की है।
आम चुनाव और रिजल्ट का करना होगा इंतजार
आज जबकि राहुल गांधी ने न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित करने की बात कही है, तो पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने इसे पिछले दो साल से चल रहा प्रयास बताया है। पी चिदंबरम ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा कि साल 2004 से 2014 के बीच 14 करोड़ लोगों को गरीबी से मुक्त किया गया।
उन्होंने लिखा कि पिछले 2 साल से यूनिवर्सल बेसिक इनकम(यूबीआई) के सिद्धांत पर काम हो रहा है। अब समय आ गया है कि इसे लागू किया जाए। हालांकि उनका यह समय आने में कितनी देर होगी और राहुल गांधी का दावा कितना सही साबित हो पाएगा, इसका जवाब आम चुनाव के रिजल्ट के बाद पता चल पाएगा।