पर्थ में सातवें भारत महासागर सम्मेलन के मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पेनी वोंग ने आज कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। बैठक की शुरुआत दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत के साथ ही हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।
भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर चर्चा
जयशंकर और पेनी वोंग ने भारत और महासागर क्षेत्र से संबंधित मामलों पर विशेष ध्यान देने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि भी की। बैठक में भारत-प्रशांत क्षेत्र शांति और स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा की गई। इस दौरान पश्चिमी एशिया की स्थिति को भी चर्चा में शामिल किया गया।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'आज पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री से मिलकर खुशी हुई। हिंद महासागर से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। हमने भारत-प्रशांत के साथ पश्चिमी एशिया और अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की।'
बता दें कि जयशंकर पर्थ में दो दिवसीय भारत महासागर सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं। हिंद महासागर सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के लिए एक प्रमुख कंसल्टेटिव फोरम है, जिसे भारत फाउंडेशन के सहयोग से विदेश मंत्रालय द्वारा हर साल आयोजित किया जाता है।
सम्मेलन में बोले जयशंकर
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, 'हमारी द्विपक्षीय वास्तुकला विदेशी रक्षा, व्यापार, बिजली, शिक्षा और कुशल मंत्रियों की नियमित बैठकों को पूरा करती है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय का काफी विस्तार हुआ है और ईसीटीए (आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता) ने हमारे व्यापार को बढ़ावा भी दिया है। पिछले दशकों में प्रत्येक ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात की है। वर्तमान पीएम के बीच सात बार मुलाकात हो चुकी है। हमारे बीच एक मजबूत, और गहरा रिश्ता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने समानांतर रूप से विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ा दिया है। हिंद महासागर के देशों को आज इस पर विचार करने की आवश्यकता है कि क्या उन्हें अधिक सामूहिक आत्म-गठबंधन को अपनाना चाहिए या अतीत की तरह असुरक्षित बने रहना चाहिए।'
इस कार्यक्रम में 22 से अधिक देशों के मंत्रियों, 16 देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और छह बहुपक्षीय संगठन शामिल होते हैं। उनके अलावा 40 देशों से 400 के करीब सामाजिक और कॉर्पोरेट नेता नीति व्यवसायी, विद्वान, मीडियाकर्मी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनते हैं। साल 2016 में सिंगापुर में स्थापना के बाद भारतीय महासागर सम्मेलन क्षेत्र के देशों और प्रमुख समुद्री भागीदारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।