भारत लगातार खाड़ी देशों के साथ अपनी दोस्ती बढ़ा रहा है, इस कड़ी में भारतीय नौसेना ने मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ संबंध बढ़ाने पर जोर देना शुरू कर दिया है। नौसेना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक भारत ने मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ द्विपक्षीय समुद्री सहयोग बढ़ाने के अपने प्रयासों के तहत अपना प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी को ईरान और ओमान समेत खाड़ी क्षेत्र में भेजा है।
मस्कट, दुबई और बंदर अब्बास बंदरगाह पर ठहर चुका है भारतीय पोत
अधिकारियों ने बताया कि एक महीने की तैनाती के तहत जहाज पहले ही मस्कट, दुबई और बंदर अब्बास बंदरगाह पर ठहर चुका है, इसके अलावा रॉयल ओमान नेवी (आरएनओ), यूएई नेवी और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान (आईआरआई) नेवी के साथ पेशेवर बातचीत भी की है।
पोत आईएनएस सुदर्शिनी के तैनाती के दौरान किए गए विभिन्न प्रशिक्षण
नौसेना ने एक बयान में कहा कि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित जहाज ने स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन किया और खाड़ी के साथ भारत के ऐतिहासिक समुद्री संबंधों का पुनरीक्षण किया। नौसेना ने एक बयान में कहा कि पोत आईएनएस सुदर्शिनी के तैनाती के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण किए गए, जिसमें आरएनओ और आईआरआई नौसेना के प्रशिक्षुओं को समुद्री प्रशिक्षण दिया गया और समुद्री अभ्यास आयोजित किए गए।
मिशन सागर : 500 टन खाद्य सामग्री लेकर मोजाम्बिक पहुंचा आईएनएस केसरी
मिशन सागर योजना के तहत शनिवार को आईएनएस केसरी 500 टन खाद्य सामग्री लेकर मोजाम्बिक देश के मापुतो तट पर पहुंच गया। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि महामारी के दौर में उत्पन्न चुनौतियों के बीच भारत सरकार मोजाम्बिक सरकार की मदद के लिए तत्पर है और इसी नीति के तहत आईएनएस केसरी से 500 टन खाद्य सामग्री भेजी गई।
मंत्रालय की ओर से बताया गया कि भारत पहले से मोजाम्बिक की सेना के साथ मिलकर मजबूती देने का कार्य कर रहा है। इसलिए दो तेज इंटरसेप्टर क्रॉफ्ट और रक्षा उपकरण की मदद भी सैन्य बल को भेजी गई है। मंत्रालय ने कहा कि सामुद्रिक तटों से सटे देशों को महत्व देते हुए भारत उनके साथ अच्छे व मजबूत संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बता दें कि मई-जून 2020 में आईएनएस केसरी के जरिए मालदीव, मॉरीशस, सेशल्स, मेडागास्कर और कॉमरॉस देश को भारतीय नौसेना ने अलग-अलग लोकेशन में मेडिकल उपकरण की मदद पहुंचाई थी। मई, 2020 से लेकर अभी तक मिशन सागर योजना के तहत भारतीय नौसेना 15 मित्र देशों में सहायता कर चुकी है।