फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समुद्र में चीन से निपटने के लिए नौसेना की जरूरत बना तीसरा विमानवाहक, पीएम को दी गई जानकारी

Sat, 05 Dec 2020 11:12 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
आईएनएस विक्रामादित्य (फाइल फोटो) - फोटो : www.indiannavy.nic.in
विज्ञापन

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा है कि एशिया में वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एक तीसरे विमानवाहक पोत की जरूरत है। इसकी जानकारी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचा दी है। 

विज्ञापन


कैबिनेट मंजूरी समेत तमाम प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद एक विमानवाहक पोत को बनने में 18 वर्ष का समय लग जाता है। ऐसा आईएनएस विक्रांत के मामले देखा जा चुका है। वहीं, चीन द्वारा अब छठे विमानवाहक पोत को समुद्र में उतारने की तैयारी है, ऐसे में भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों को अब भारतीय विमानवाहक पोत को लेकर कोई कदम उठाना होगा।  


नौसेना दिवस के मौके पर नौसेना प्रमुख ने कहा था कि भारत अगर पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है तो इसे खुद की सुरक्षा करने के अलावा अपनी सामरिक शक्ति का भी प्रदर्शन करना होगा।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: अरब सागर में भारत का 'वजीर': स्कॉर्पीन श्रेणी की 5वीं पनडुब्बी नौसेना में शामिल, जानें क्या है खासियत

भारतीय सैन्य हलकों में तीसरे विमानवाहक पोत को लेकर बहस शुरू हो गई है, क्योंकि नौसेना को यह बताना होगा कि लंबी दूरी के स्टैंड-ऑफ हथियारों के युग में यह पोत कितने समय तक टिक पाएगा। वास्तव में चीन के पास डीएफ-21 मिसाइल है, जिसकी रेंज 1700 किमी है। चीन में इसे 'शिप किलर' का नाम दिया गया है। 

भारतीय नौसेना का मानना है कि उसे शक्ति प्रदर्शन को लेकर भारतीय प्रायद्वीप तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समुद्र में उसकी मौजूदगी लंबी दूरी तक होनी चाहिए। वहीं, वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि सरकार 10 बिलियन डॉलर (70 हजार करोड़ रुपये) के विमानवाहक पोत को मंजूरी दे पाएगी।  

नौसेना आईएनएस विक्रमादित्य में स्काई जंग एसटीओबीएआर (शॉर्ट टेक-ऑफ, बैरियर अरेस्ट रिकवरी सिस्टम) के विपरीत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम के साथ 65,000 टन का विमानवाहक चाहती है। 
विज्ञापन


दूसरी तरफ, भारतीय सुरक्षा नियोजकों का कहना है कि यदि भारत बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर में अपने कुछ 1,062 द्वीप क्षेत्रों को सैन्य ठिकानों में परिवर्तित करने में इस तरह का पैसा लगाता है, तो यह मलक्का जलडमरू और फारस की खाड़ी तक वायु शक्ति को प्रदर्शित कर सकता है। वहीं, अगर द्वीप क्षेत्रों में स्थायी ठिकानों को लेकर नकारात्मक पहलू यह है कि वे चीनी 'गुआम किलर' डीएफ 26 मिसाइल की रेंज में होंगे।  

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें