फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समुद्र में चीन-पाक को पछाड़ेगा भारत, परमाणु पनडुब्बियों को बनाने का काम शुरू

Mon, 24 Jun 2019 06:08 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
आईएनएस चक्र पनडुब्बी (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
विज्ञापन
चीन और पाकिस्तान की ओर से हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपनी रक्षा तैयारियों को तेज कर दिया है। नौसेना की ताकत में इजाफा करने के लिए छह परमाणु शक्ति चलित पनडुब्बियों को बनाने का काम शुरू हो गया है। इस परियोजना की लागत लगभग एक लाख करोड़ रुपये है।
विज्ञापन


परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अगली पीढ़ी की पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए मिश्रधातु निगम एक विशेष प्रकार की धातु के परीक्षण की योजना बना रहा है। इससे इन पनडुब्बियों को मजबूती मिलेगी साथ ही पानी के नीचे रहने की ताकत में भी भारी इजाफा होगा। सरकार ने इसके पहले चरण के लिए 100 करोड़ रुपये की धनराशि जारी भी कर दी है।

साल 2015 में मोदी सरकार ने भारतीय नौसेना के लिए लंबित परियोजना को आगे बढ़ाते हुए छह परमाणु शक्ति चलित अटैक पनडुब्बियों (एसएसएन) के निर्माण को मंजूरी दी थी। इन पनडुब्बियों को नौसेना के डिजाइन निदेशालय में डिजाइन किया जाएगा और विशाखापत्तनम में शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाया जाएगा।
विज्ञापन


भारतीय नौसेना इस समय कुल 15 पनडुब्बियों का संचालन कर रही है जिसमें आईएनएस अरिहंत और आईएनएस चक्र परमाणु शक्ति संचालित हैं। आईएनएस चक्र को रूस से 10 साल की लीज पर लिया गया है जबकि अरिहंत का निर्माण भारत में ही किया गया है। ये दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल हमले को अंजाम दे सकती हैं।

यह भी पढ़ेंः दुनिया के लिए खतरा हैं परमाणु हथियार संपन्न देश, किसके पास कितने एटम बम

इस परियोजना में भारत को अरिहंत के निर्माण से जुड़े अनुभव काम आएंगे। एसएसएन श्रेणी की ये पनडुब्बियां ज्यादा गहराई तक गोता लगाने में सक्षम होंगी। जबकि इनके सोनार और रडार पहले की तुलना में ज्यादा एडवांस होंगे। उर्जा को पैदा करने के लिए इन पनडुब्बियों में नवीन तकनीकी वाले परमाणु रिएक्टर लगाए जाएंगे।

प्रोजक्ट-75: कतार में खड़ी एक और पनडुब्बी निर्माण परियोजना

आईएनएस वेला (फाइल) - फोटो : PTI
भारतीय नौसेना को मजबूती देने के लिए गुरुवार (20 जून) को रक्षा मंत्रालय ने प्रोजेक्ट-75 के तहत 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियों को बनाने के लिए भारतीय रणनीतिक साझेदारों को प्रस्ताव के लिए आग्रह (एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट) जारी किया था। ये पनडुब्बियां रडार की पकड़ में नहीं आने वाली प्रौद्योगिकी से लैस होंगी। मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत जारी इस कांट्रैक्ट की लागत लगभग 45 हजार करोड़ रुपये है। जिसमें छह पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर के तहत किया जाएगा।

हालांकि, नौसेना के लिए प्रोजेक्ट 75 को शुरू हुए तीन साल से भी ज्यादा का समय हो चुका है। साल 2017 में छह अत्याधुनिक पनडुब्बी निर्माण करने की महत्वकांक्षी परियोजना के लिए चार विदेशी कंपनियां मुख्य रूप से सामने आई थीं।

उस समय फ्रांस की कंपनी नावन ग्रुप, रूस की रोसोबोरोन एक्सपोटर्स रुबिन डिजाइन ब्यूरो, जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और स्वीडन की साब ग्रुप ने इस परियोजना में भाग लेने के लिए रुचि दिखाई थी।

इस बार भी इन्हीं कंपनियों को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है जिसमें से किसी एक को यह टेंडर दिया जा सकता है। हालांकि इन्हें पनडुब्बी का निर्माण भारत में ही करना होगा। इस परियोजना का उद्देश्य विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर देश में पनडुब्बी और लड़ाकू विमान बनाने जैसे सैन्य प्लेटफार्म को तैयार करना है।
विज्ञापन

वर्तमान में ये पनडुब्बियां भारतीय नौसेना में हैं कार्यरत

आईएनएस वेला (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
पनडुब्बी कमीशन की तिथि श्रेणी
आईएनएस कलवारी 14 दिसंबर 2017 स्कार्पियन क्लास
आईएनएस चक्र 4 अप्रैल 2012 अकूला क्लास
आईएनएस सिंधुघोष 30 अप्रैल 1986 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुराज 20 अक्टूबर 1987 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुवीर 26 अगस्त 1988 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुरत्न 22 दिसंबर 1988 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुकेसरी 16 फरवरी 1989 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुकीर्ति 4 जनवरी 1990 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुविजय 8 मार्च 1991 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस सिंधुशस्त्र 19 जुलाई 2000 किलो क्लास डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस शिशुमार 22 सितंबर 1986 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस संकुश 20 नवंबर 1986 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस शल्की 7 फरवरी 1992 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
आईएनएस संकुल 28 मई 1994 टाइप 1500 डीजल इलेक्ट्रिक
     
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें