सीजेआई चंद्रचूड़ ने गौहाटी उच्च न्यायालय की आइजोल पीठ के नए भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद अपने संबोधन में कहा कि कानून का शासन राष्ट्र और न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों को बनाए रखता है।
'हिंसा की संस्कृति को संवाद-सहिष्णुता में बदला'
उन्होंने कहा, 'दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां समस्याओं का समाधान हथियारों के जरिए होता है। लेकिन हमारी संस्था का महत्व यह है कि हमने हिंसा की संस्कृति को संवाद की संस्कृति, सहिष्णुता की संस्कृति, समझ की संस्कृति और इस एहसास से बदल दिया है। हम इंसानों में खुशी लाने के लिए मूल्यों को साझा करते हैं।'
'संवाद की भावना ने पूरे देश में समझ को बढ़ावा दिया'
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि न्याय की अदालत समाज को जो महत्वपूर्ण संदेश देती है, वह यह है कि हम कानून के शासन के लिए खड़े हैं, हम विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए खड़े हैं। उन्होंने कहा कि समुदायों और विभिन्न हित धारकों के बीच संवाद की भावना ने पूरे देश में समझ की भावना को बढ़ावा दिया है।
महिलाओं से किया न्यायपालिका में शामिल होने का आग्रह
उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में न्यायपालिका में शामिल हों। चंद्रचूड़ ने यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयासों का आह्वान किया कि कार्यस्थल (वर्कप्लेस) उनके लिए अधिक अनुकूल हो। सीजेआई ने यह भी कहा कि आधुनिक सुविधाओं के साथ आइजोल पीठ का नया भवन सही दिशा में एक कदम है।
5 जुलाई, 1990 को हुई थी आइजोल पीठ की स्थापना
गौहाटी उच्च न्यायालय की आइजोल पीठ की स्थापना 5 जुलाई, 1990 को हुई थी। यह मिजोरम की राजधानी के केंद्र से लगभग 5 किमी की दूरी पर ऐनावन वेंग से कार्य करता था। नए भवन की आधारशिला चार मार्च 2017 को मिजोरम के मुख्यमंत्री लल थनहवला और गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजीत सिंह ने रखी थी।