भारतीय सेना का बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहा स्वावलंबन शक्ति युद्धाभ्यास मंगलवार को खत्म हो गया। दक्षिणी कमान के तहत सेना की सुदर्शन चक्र कोर ने झांसी के नजदीक बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 17 से 22 अक्तूबर तक तीन दिनों का ‘स्वावलंबन शक्ति अभ्यास’ का आयोजन किया था। सुदर्शन शक्ति कोर को XXI कोर के नाम से भी जाना जाता है। यह सेना की स्ट्राइक कोर है और इसका मुख्यालय भोपाल में है। इस अभ्यास में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सेना ने स्वदेशी तकनीकों को प्रदर्शन किया था।
न्यू टेक्नोलॉजी इक्विपमेंट्स पर फोकस
सेना से मिली जानकारी के मुताबिक स्वावलंबन शक्ति में न केवल लाइव फायर एक्सरसाइज की गई, बल्कि बड़े पैमाने पर भविष्य की युद्ध रणनीतियों को आकार देने के लिए न्यू टेक्नोलॉजी इक्विपमेंट्स पर भी फोकस किया गया। दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अभ्यास के समापन समारोह में हिस्सा लिया और स्वदेशी तकनीकी समाधानों पर भारतीय सेना की प्रशंसा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, स्वावलंबन शक्ति अभ्यास आत्मनिर्भरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय उद्योगों के इनोवेशंस हमारी क्षमताओं को बदल रहे हैं, और हम अपने ऑपरेशंस में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जारी रखेंगे।
इस अभ्यास में 1,800 से अधिक जवानों, 210 बख्तरबंद वाहनों, 50 स्पेशलिस्ट व्हीकल्स और कई एयर औऱ एविएशन एसेट्स ने हिस्सा लिया। डीआरडीओ, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, भारत फोर्ज और कई नए डिफेंस स्टार्टअप समेत 40 से अधिक उद्योग जगत के भागीदारों ने 50 से अधिक अपनी अत्याधुनिक तकनीकें साझा कीं, जिनका युद्ध के मैदान जैसी परिस्थितियों में ट्रायल किए गए। इनमें सटीक हमलों और टोही के लिए स्वॉर्म और कामिकेज ड्रोन, वॉर जोन में तेजी से डिफेंस सप्लाई के लिए लॉजिस्टिक स्वॉर्म ड्रोन, दुश्मन के ड्रोन को बेअसर करने के लिए हैंडहेल्ड ड्रोन जैमर और सिक्योर एवं रियल टाइम कम्यूनिकेशन के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो बेस्ड मोबाइल नेटवर्क सिस्टम शामिल रहे। इसके अलावा रोबोटिक खच्चर और ऑल-टेरेन वाहन (एटीवी)/लाइट आर्मर्ड मल्टीपर्पज वाहन (एलएएमवी), अगली पीढ़ी की हवाई रक्षा के लिए लेजर-बेस्ड कम्यूनिकेशन सिसटम और डायरेक्टेड एनर्जी विपंस और निगरानी मिशनों के लिए लंबे समय तक चलने वाले यूएवी का भी ट्रायल किया गया।
मेले में शामिल किए गए कई एडवांस ड्रोन
सेना के मुताबिक 21-22 अक्तूबर को सदर्न स्टार ड्रोन मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें एमएसएमई, स्टार्टअप्स, और डिफेंस इनोवेटर्स ने अपने लेटेस्ट ड्रोन और एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी को पेश किया। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने कहा, यह ड्रोन मेला बताता है कि हमारे देश सशस्त्र बलों की क्या जरूरतें हैं। साथ ही यह बताता है कि सरकार किस तरह से देश की ड्रोन इंडस्ट्री को सपोर्ट कर रही है। सेना का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से पता चलता है कि भारतीय सेना निजी क्षेत्र के साथ मजबूत संबंध बनाने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है, क्योंकि वह अपनी फोर्स को न केवल मॉडर्न बनाना चाहती है, बल्कि भविष्य की जंगों के लिए तैयार करना चाहती है।