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बेमिसाल: भारतीय सेना को मिले बेल्जियन मैलिनोइस नस्ल के शिकारी कुत्ते, ओसामा- बगदादी का किया था ऐसा हाल

Sun, 28 Nov 2021 07:53 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट्स की मानें तो सेना को बेल्जियन मैलिनोइस ट्रेनिंग के लिए पहले ही मिल गए थे। हालांकि, अभी कितनी संख्या में इस नस्ल के कुत्ते मिले हैं, इस पर जानकारी साफ नहीं की गई है। 
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बेल्जियन मैलिनोइस। - फोटो : Social Media
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विस्तार
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भारतीय सेना को शिकारी कुत्ते बेल्जियन मैलिनोइस मिल गए हैं। कुत्तों की यह नस्ल शहरी इलाकों में चलाए जा रहे ऑपरेशन के दौरान अपनी आक्रामकता और जासूसी कौशल के लिए जाने जाते हैं। सेना ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक भी वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एक ट्रेन्ड बेल्जियन मैलिनोइस को सैनिक के आदेश पर तेजी से एक तालाब को पार करते देखा जा सकता है। 
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सेना ने अपने ट्विवटर हैंडल पर लिखा, "इस नस्ल को तेजी, फुर्ती, सहशीलता, काटने की क्षमता, बुद्धिमता और ट्रेनिंग ग्रहण करने की काबिलियत के लिए जाना जाता है।" रिपोर्ट्स की मानें तो सेना को बेल्जियन मैलिनोइस ट्रेनिंग के लिए पहले ही मिल गए थे। हालांकि, अभी कितनी संख्या में इस नस्ल के कुत्ते मिले हैं, इस पर जानकारी साफ नहीं की गई है। 

क्यों लोकप्रिय है कुत्तों की यह नस्ल?
मौजूदा समय में दुनियाभर की सेनाएं इस नस्ल के कुत्तों को इस्तेमाल कर रही हैं। खासकर अमेरिकी सेना इन कुत्तों का इस्तेमाल कर दुश्मन को खत्म करने के अपने दो सबसे बड़े ऑपरेशन अंजाम दे चुकी है। इनमें एक ऑपरेशन ओसामा बिन लादेन को ऐबटाबाद में मार गिराने का था। 
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इसके अलावा सीरिया में 2019 में आईएस के सरगना अबु बकर अल-बगदादी को खत्म करने के ऑपरेशन में इन्हीं बेल्जियन मैलिनोइस ने ही बड़ी भूमिका निभाई थी और बगदादी को घुमावदार अंधेरी सुरंगों में दौड़ाया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्विटर हैंडल से एक बेल्जियन मैलिनोइस की फोटो पोस्ट की थी। 

ये खूबी बनाती है जर्मन शेफर्ड से खतरनाक
बेल्जियन मैलिनोइस के मुकाबले यह ब्रीड पैराशूट फ्लाइट के लिए बेहतर मानी जाती है। इनके छोटे ढांचे की वजह से इन्हें सुरंग और गलियों में भी आसानी से घुसने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इन्हीं खूबियों की वजह से भारत में कुछ अर्धसैनिक बल इन्हें अपने खर्च से खरीद चुके हैं। सबसे पहले सीआरपीएफ ने इनका इस्तेमाल नक्सलरोधी अभियान के लिए किया था इसके बाद आईटीबीपी और एनएसजी ने भी बेल्जियन मैलिनोइस को इस्तेमाल करना शुरू किया। एनएसजी ने तो गणतंत्र दिवस की परेड में भी इस नस्ल को उतारा था। 
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