7.62x51 मिमी असॉल्ट राइफलों की कमी से जूझ रही भारतीय सेना के रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी SIG SAUER को अतिरिक्त 73,000 SIG716 असॉल्ट राइफल्स के समझौते पर दस्तखत किए हैं। दिसंबर 2023 में डीएसी ने लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से अतिरिक्त 70,000 राइफलें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। वहीं, इसी साल की शुरुआत में भारतीय सेना को 62,000 एके-203 कलाश्निकोव असॉल्ट राइफलों की डिलीवरी की गई थी। वहीं, नॉर्दर्न कमांड ने भी स्वदेशी इंसास राइफलों को अपग्रेड करने का फैसला लिया था। खास बात यह है कि यह ऑर्डर उस समय दिया गया है कि जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 23 अगस्त से 26 अगस्त तक चार दिवसीय वाशिंगटन पर थे।
भारतीय सेना में 145,400 SIG716 असॉल्ट राइफलें
भारत सरकार ने रक्षा मंत्रालय के जरिए सिग सॉयर कंपनी को दूसरी बार 73,000 SIG716 असॉल्ट राइफल्स का ऑर्डर जारी किया है। इस समझौते की कीमत 800 करोड़ रुपये बताई जा रही है। दिसंबर 2023 में राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से अतिरिक्त 70,000 राइफलें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
इस ऑर्डर के पूरा होने के बाद, भारतीय सेना के पास कुल 145,400 SIG716 असाल्ट राइफलें हो जाएंगी। इससे पहले सेना ने फरवरी, 2019 में सिग सॉयर के साथ 700 करोड़ रुपये का समझौता करके 72,400 सिग-716 असॉल्ट राइफलें खरीदीं थीं। इन 72,400 राइफलों में से 66,400 सेना के लिए, 4,000 वायु सेना के लिए और 2,000 नौसेना के लिए थीं। पहले इन राइफलों को केवल फ्रंट लाइन में तैनात सैनिकों को ही देने की योजना थी, लेकिन बाद में सभी 400 से अधिक इन्फैंट्री बटालियनों को लैस करने का फैसला किया गया।
क्या SOSA के तहत हुआ फैसला?
एसआईजी सॉयर, इंक के अध्यक्ष और सीईओ रॉन कोहेन ने कहा, हमें भारतीय सेना के आधुनिकीकरण प्रयास में भागीदार होने पर गर्व है, और इससे भी अधिक गर्व इस बात का है कि एसआईजी716 राइफल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना के साथ रक्षा मंत्रालय के आधुनिकीकरण लक्ष्यों को हासिल करती है। इससे पहले पिछले साल दिसंबर में भारतीय सेना ने सिग सॉयर को 800 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की 70,000 से अधिक असॉल्ट राइफल खरीदने की मंजूरी दी थी।
माना जा रहा है कि यह वही ऑर्डर है, जिसे राजनाथ सिंह के अमेरिका दौरे के बाद एग्जीक्यूट किया गया है। माना जा रहा है कि भारत औऱ अमेरिका के बीच हुए सिक्योरिटी ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट (SOSA) अग्रीमेंट हुआ था। SOSA द्विपक्षीय और गैर-बाध्यकारी समझौता है, जिसे अमेरिका ने अभी तक केवल 18 देशों के साथ ही किया है। इस समझौते के तहत, दोनों देश राष्ट्रीय रक्षा को बढ़ावा देने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक-दूसरे को प्राथमिकता देंगे। वहीं, माना जा रहा है कि सोसा पर दस्तखत होने के बाद ही एसआईजी716 के ऑर्डर को मंजूरी मिली है।
सेना को नई असाल्ट राइफलों की सख्त जरूरत
नॉर्दर्न कमांड के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया था कि भारतीय सेना को नई असाल्ट राइफलों की सख्त जरूरत है। राइफलों को अपग्रेड करना केवल समस्या का तात्कालिक हल है, लेकिन पूर्ण रूप से यह हल नहीं है। सेना को नई राइफलों की जरूरत है और इसके बिना सेना के आधुनिकीकरण की बात करने का कोई मतलब नहीं है।
सेना को चाहिए 7.62x51 मिमी कैलिबर वाली राइफलें
रक्षा सूत्रों ने तब कहा था कि इस हथियार का चयन 2016 में सेना की ऑपरेशनल फिलॉस्फी में बदलाव के बाद किया गया था। इस फिलॉस्फी में 5.56 x 45 मिमी कैलिबर वाली राइफलों की जगह पर 7.62 x 51 मिमी कैलिबर वाली राइफलों को चुना गया था। SiG 716 असॉल्ट राइफल की कैलिबर क्षमता 7.62x51 मिमी की है, जबकि INSAS राइफल की कैलिबर क्षमता 5.56x51 मिमी कैलिबर औऱ AK-47 राइफल की कैलिबर कैपेसिटी 7.62x39 मिमी है, इनकी तुलना में SiG 716 की रेंज 600 मीटर है, वहीं इसकी मारक क्षमता भी ज्यादा है और आतंकरोधी अभियानों में यह ज्यादा कारगर है।
62000 AK-203 असॉल्ट राइफल्स की डिलीवरी
भारतीय सेना में असॉल्ट राइफलों की कमी को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने AK-203 असॉल्ट राइफलें बनाने के लिए जुलाई 2021 में रूस के साथ 5000 करोड़ रुपये का सौदा भी किया था। जिसके तहत 6.7 लाख से ज्यादा AK-203 असॉल्ट राइफलों का निर्माण किया जाना था। लेकिन उनमें से केवल अभी तक केवल 62000 AK-203 असॉल्ट राइफल्स की ही डिलीवरी हो पाई है। इस साल प्रधानमंत्री मोदी के मॉस्को दौरे से पहले जुलाई में भारतीय सेना को 35,000 एके-203 कलाश्निकोव असॉल्ट राइफलों की डिलीवरी की गई थी। वहीं, इससे पहले मई में 27 हजार एके-203 राइफलें भारतीय सेना को सौंपी गई थीं। डिलीवरी में देरी की वजह स्वदेशी पार्ट्स को लेकर मतभेद और लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को माना जा रहा है।
नॉर्दर्न कमांड का इंसास को अपग्रेड करने का फैसला
AK-203 असॉल्ट राइफलों की डिलीवरी में देरी को देखते हुए देश की नॉर्दर्न कमांड ने देहरादून की कंपनी स्टार एरोस्पेस को 40 हजार INSAS (इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम) राइफलों को अपग्रेड करने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इनमें से कुछ राइफल्स की डिलीवरी भी शुरू हो गई है। इंसास राइफल में यह अपग्रेड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत किया जा रहा है। जिनमें स्वदेश में ही बनीं इंसास राइफलों को स्वदेशी कंपनी ही अपग्रेड कर रही है। वहीं इसके पार्ट्स भी स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चर किए गए हैं।
बता दें कि भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में लगभग 20 लाख असाल्ट राइफलें हैं, जिनमें INSAS, AK-203, AK-47, M4A1 कार्बाइन, T91 असॉल्ट राइफल, SIG सॉयर 716 और टेवर प्रमुख हैं। इस समय लगभग 10 लाख इंसास राइफलें उपयोग में हैं। सशस्त्र बल सेना सेवाओं में 810,000 असॉल्ट राइफलों का उपयोग किया जाता है, जिसमें अकेले सेना 7,60,000 राइफलों का उपयोग करती है।
सिग सॉर सिग-716 की खासियतें
सिग सॉर सिग-716 असॉल्ट राइफल की बात करें, तो इसमें 7.62x51 एमएम की नाटो ग्रेड की गोलियां लगती हैं। इस राइफल की कुल लंबाई 34.39 इंच है, जबकि बैरल लेंथ 16 इंच है। इसका कुल वजन 3.58 किलोग्राम है। इसमें ऊपर एडजस्टेबल फ्रंट और रीयर ऑप्टिक्स लगाने की सुविधा है। इसमें M1913 मिलिट्री स्टैंडर्ड रेल्स भी हैं, जिनपर नाइट विजन डिवाइस, टॉर्च या मिशन के हिसाब से कोई और डिवाइस भी लगाई जा सकती है। इसकी एक मैगजीन में 20 गोलियां लगती हैं। इसकी रेंज 600 मीटर है। सिग सॉर सिग-716 असॉल्ट राइफल हर मिनट में 685 राउंड फायरिंग कर सकती है। इसमें शॉर्ट-स्ट्रोक पिस्टन-ड्रिवेन ऑपरेटिंग सिस्टम लगा है, जिसके चलते चलाने वाले को कम झटका लगता है और एक्यूरेसी बढ़ जाती है।