शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
डोकलाम विवाद पर भारत न तो चीन के उकसावे में आएगा और न ही अपने पुराने रुख से रत्ती भर भी समझौता करेगा। विवाद के हल के लिए पर्दे के पीछे हो रही कूटनीतिक बातचीत में भारत, चीन के समक्ष बार-बार दोनों देशों से एक साथ सेना हटाने का प्रस्ताव रख रहा है।
गौरतलब है कि इस विवाद पर जर्मनी में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी। इसके बाद कुछ दिनों तक चीन ने चुप्पी साध ली मगर अब उसकी तरफ से फिर से धमकियां देने का सिलसिला शुरू हुआ है। बुधवार को भी चीन ने सेना हटाने या कार्रवाई झेलने की चेतावनी दी है।
चीन की धमकी को भारत दबाव बढ़ाने से ज्यादा अहमियत नहीं दे रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार धमकियां दे कर भारत को उकसाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि भारत की ओर से उसके उकसावे में आए बिना मामले का कूटनीतिक हल निकालने का लगातार मगर सधा हुआ संदेश दिया जा रहा है।
बताते हैं कि ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के सम्मेलन के इतर कूटनीतिक गतिविधियों में एनएसए अजित डोभाल ने चीन को स्पष्ट कर दिया है कि चीनी सेना के दोकलम क्षेत्र में मौजूद रहते भारत अपनी सेना को नहीं हटाएगा। डोभाल की तरफ से दोनों देशों की सेना को एक साथ पीछे हटने का प्रस्ताव दिया गया है।
भूटान को साधने में चीन असफल
भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए चीन ने भूटान पर भी दबाव डालने की कोशिश की थी। इसमें मिली असफलता के बाद उसने नए सिरे से भारत पर दबाव डालने की शुरुआत की है। भारत ने चीन से दो टूक शब्दों में कहा है कि वह दोकलम क्षेत्र में चीन की सीमा में नहीं बल्कि भूटान के क्षेत्र में है।
सैनिक कम करने की चीन ने उड़ाई अफवाह
दबाव बनाने के लिए चीन ने अचानक दोकलम क्षेत्र में भारत की ओर से सैनिकों की संख्या 2400 से घटा कर 40 करने की अफवाह फैलाई। जबकि भारतीय पक्ष का कहना है कि उसकी ओर से उस क्षेत्र में 400 सैनिक भेजे गए थे। विवाद का हल होने तक सभी सैनिक वहां डटे रहेंगे।