समझौते के तहत संस्कृति से जुड़ी संपत्तियों की अवैध तस्करी पर लगाम लगाई जाएगी। अमेरिका में भारत की 297 ऐतिहासिक वस्तुएं हैं, जिन्हें भारत में वापस लाया जाएगा। 1976 से अब तक भारत द्वारा अमेरिका से 358 प्राचीन वस्तुओं को वापस लाया गया है।
भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। समझौते के तहत संस्कृति से जुड़ी संपत्तियों की अवैध तस्करी पर लगाम लगाई जाएगी। इसके अलावा पौराणिक वस्तुओं को उनके मूल स्थान पर लौटाने को लेकर भी समझौता हुआ है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। आपको बता दें कि दिल्ली के भारत मंडपम में विश्व धरोहर समिति का 46वां सत्र चल रहा है। इस सत्र के इतर भारत के केंद्रीय संस्कृति सचिव गोविंद मोहन और भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
केंद्रीय संसकृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह एक सामान्य समझौता है जिसके तहत, अमेरिका से भारत की पौराणिक वस्तुओं और ऐतिहासिक कलाकृतियों को स्वदेश लाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका में भारत की 297 ऐतिहासिक वस्तुएं हैं , जिन्हें भारत में वापस लाया जाएगा। शेखावत ने कहा कि वर्ष 1976 से अब तक भारत द्वारा अमेरिका से 358 प्राचीन वस्तुओं को वापस लाया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘यह समझौता हमारी संस्कृति से जुड़ी पौराणिक वस्तुओं की अवैध तस्करी पर लगाम लगाने के लिए हुआ है। इसके अलावा ऐतिहासिक वस्तुओं को उनके मूल स्थान पर वापस लौटाना भी इस समझौते की प्रमुख बात है।’
अमेरिकी दूतावास ने समझौते पर खुशी जताई
उधर, अमेरिकी दूतावास ने भी इस समझौते को लेकर खुशी जताई है। अमेरिकी दूतावास का कहना है कि इसके ही भारत, अमेरिका के उन 29 साझेदारों में शामिल हो गया है, जो आपस में सांस्कृतिक संपत्तियों को साझा करते हैं। अमेरिकी दूतावास ने कहा, ‘इस समझौते के तहत दो खास बातों का ध्यान रखा गया है। सबसे पहली बात यह कि यह भारतीयों को उनकी पौराणिक वस्तुएं लौटाई जाएंगीं। दूसरी बात यह कि इससे भारत दुनिया से भी जुड़ेगा।’
विज्ञापन
एरिक गार्सेटी ने भारत के लिए कही खास बात
अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने यहां एक प्रमुख बात कही। उन्होंने कहा ‘भारत की संस्कृति को जानने का मतलब मानव जाति की संस्कृति से रूबरू होना है। अमेरिका के हर व्यक्ति और विश्व के प्रत्येक व्यक्ति को इस संस्कृति को महसूस करना चाहिए, जिसका हम यहां जश्न मना रहे हैं।’इस दौरान बारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने भी विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र की मेजबानी के लिए भारत को शुभकामनाएं दीं।