भारत और ब्रिटेन ने मंगलवार को सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़े एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य दोनों देशों में अस्थायी नियुक्ति पर काम करने वाले कर्मचारियों को दोहरा सामाजिक सुरक्षा अंशदान भरने से बचाना है। यह राहत अधिकतम 36 महीने की अवधि के लिए लागू होगी।
राजधानी दिल्ली में इस समझौते पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता जुलाई 2025 में हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के दौरान की गई प्रतिबद्धताओं का हिस्सा है। इस समझौते से दोनों देशों के पेशेवरों को अल्पकालिक विदेशी नियुक्ति के दौरान अपने मूल देश की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा। इससे प्रतिभा और कुशल पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी, खासकर सेवा और तकनीक क्षेत्र में।
विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत पहले भी कई देशों के साथ ऐसे द्विपक्षीय सामाजिक सुरक्षा समझौते कर चुका है, ताकि विदेश में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के हित सुरक्षित रह सकें। यह समझौता सीईटीए के साथ लागू होगा, जिसे 2026 की पहली छमाही में प्रभावी किए जाने की योजना है। इससे भारत-ब्रिटेन के बीच व्यापार और सेवा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।