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अंगदान के लिए भारत में अब भी हिचक, हर साल पांच लाख लोगों की मौत

Wed, 13 Nov 2019 05:45 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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अंगदान के बारे में भारत में लोगों की समझ तो बढ़ी, लेकिन अब भी यहां मृत्यु के बाद अंगदान करने की इच्छा जताने में हिचक बरकरार है। एडलवाइज टोकियो लाइफ इंश्योरेंस के एक ताजा अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। कंपनी का कहना है कि प्रक्रिया की समझ न होने से काफी कम भारतीय मृत्यु के बाद अंगदान की इच्छा जताते हैं। देश में हर साल अंगों की कमी के कारण हर साल पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है।

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कर्वी इनसाइट्स के सहयोग से बीमा कंपनी द्वारा किये गए इस अध्ययन में देश के आठ महानगरों के अलावा लखनऊ, पटना, इंदौर और गुवाहाटी जैसे बड़े शहरों को शामिल कया गया था। इन शहरों के 1565 लोगों में से महज 24 फीसदी ने ही माना कि वह अंगदान करना चाहते हैं।

केवल तीन फीसदी लोगों ने ही अंगदान के लिए सक्षम प्राधिकरण नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन के पास बाकायदा पंजीकरण कराया था। इनमें से 80 फीसदी अंगदान की अवधारणा के बारे में जानते हैं, 67 फीसदी व्यक्ति इसे महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन केवल 35 फीसदी लोगों को प्रक्रिया की समझ है।
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एडलवाइज टोकियो लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ सुमित राय का कहना है कि जीवन बीमा के क्रम में ही उनका ध्यान मानव अंगों की कमी की ओर गया। उन्होंने कहा कि अंगदान के लिए कॉरपोरेट जगत भी आगे आएं। बीमा कंपनी ने नवंबर को अंगदान जागरूकता माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

दरअसल परिवार किसी व्यक्ति को उसके अंगदान करने में सबसे बड़ी बाधा है। 45 फीसदी लोगों का मानना है कि उनका परिवार उन्हें अंगदान की प्रतिज्ञा लेने की इजाजत नहीं देगा।

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