नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में पैदा हुई भारत की पहली हर्लेक्विन बच्ची का सोमवार को निधन हो गया। यह बच्ची जब पैदा हुई थी तो इसके शरीर पर स्किन ही नहीं थी। बच्ची के शरीर के अंदरूनी अंग साफ दिखाई दे रहे थे, जबकि बाहरी अंग अविकसित थे। बच्ची सिर्फ 48 घंटे ही जीवित रह सकी।
डाॅक्टरों ने जांच के बाद बताया था कि यह बच्ची हर्लेक्विन रोग से प्रभावित है। हर्लेक्विन दुर्लभ गंभीर किस्म का अनुवांशिक त्वचा रोग है, जिसके कारण बाहरी त्वचा की परत यानी ‘स्ट्रेटम कॉर्नियम’ मोटी हो जाती है। ऐसे मामलों में बच्चे का पूरा बदन त्वचा की मोटी सफेद प्लेटों के ‘कवच’ में लिपट जाता है। इसके अलावा, आंखें, कान, गुप्तांग और बाहरी हिस्से असामान्य तौर पर सिकुड़ जाते हैं।