हिंसा, राजनीतिक स्थिरता के बाद बांग्लादेश का एक उच्च-स्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल अगले महीने भारत आ सकता है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली ये प्रतिनिधिमंडल अपने समकक्षों के साथ पारंपरिक द्विवार्षिक सीमा वार्ता के लिए दौरा सकता है।
भारत और बांग्लादेश के बीच अगले महीने पारंपरिक द्विवार्षिक सीमा वार्ता होने की उम्मीद है। दरअसल भारत ने बांग्लादेश के साथ सीमा वार्ता की तारीखों का प्रस्ताव रखा है, वहीं सूत्रों के अनुसार बांग्लादेश का एक उच्च-स्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल अगले महीने भारत आ सकता है। पिछले महीने शेख हसीना सरकार के पतन के बाद सूचनाओं के आदान-प्रदान और साझा करने के लिए दोनों पड़ोसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की ये पहली बैठक होगी।
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BSF डीजी और BGB डीजी के नेतृत्व में वार्ता
जानकारी के मुताबिक बीएसएफ महानिदेशक (डीजी) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के डीजी के नेतृत्व में दोनों पक्षों के बीच ये वार्ता होगी। भारत ने इन वार्ताओं के लिए दो तिथियों का प्रस्ताव दिया है, एक इस महीने के अंत में और दूसरी अक्टूबर के लिए। सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी पक्ष ने संकेत दिया है कि वे बाद की तिथि चुन सकते हैं और आगमन और वापसी के दिनों सहित लगभग चार-पांच दिनों के लिए भारत की यात्रा कर सकते हैं।
सीमा प्रबंधन समेत कई मुद्दों पर चर्चा संभव
सूत्रों अनुसार आगामी बैठक व्यापक सीमा प्रबंधन, सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने, सीमा पर वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझा करने में आपसी समन्वय और बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों से संबंधित पारंपरिक मुद्दों और विषयों पर आयोजित की जाएगी, जो बैठक की रूपरेखा तय कर सकते हैं। बता दें कि बीएसएफ देश के पूर्वी हिस्से में बांग्लादेश के साथ 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय भारतीय सीमा की रक्षा करता है।
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पिछली बार ढाका में हुई थी डीजी-स्तरीय वार्ता
ये वार्ता बीएसएफ और बीजीबी के बीच डीजी-स्तरीय वार्ता का 55वां संस्करण होगा, जिसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, मादक पदार्थ निरोधक, सीमा शुल्क और दोनों देशों की कुछ अन्य संघीय एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल होंगे, जिनकी सीमा प्रबंधन में हिस्सेदारी है। इन वार्ताओं का अंतिम संस्करण मार्च में ढाका में आयोजित किया गया था। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक के दौरान, तत्कालीन बीएसएफ डीजी नितिन अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर 92 संवेदनशील पैच पर एकल पंक्ति बाड़ लगाने के लिए बांग्लादेश की सहमति हासिल करने में सफल रहा था।