मौसम विभाग के मुताबिक भारत में इस साल 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून रहा। मानसून सत्र में सामान्य तौर पर 868.6 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस साल भारत में 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह दीर्घकालिक औसत (एनपीए) का 87.4 फीसदी है। पूर्वोत्तर में 125 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा और 316 जिलों में सूखा जैसा संकट।
क्षेत्रीय विषमताएं (क्षेत्रवार आंकड़े)
जून में सबसे कम बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक इस साल जून में सामान्य से 35.4 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो पूरे मानसून सीजन में सबसे बड़ी मासिक कमी रही। अगस्त में बारिश 16.3 प्रतिशत और सितंबर में 7.6 प्रतिशत कम रही। जुलाई एकमात्र महीना रहा, जब सामान्य से अधिक बारिश हुई और बारिश एक प्रतिशत ज्यादा दर्ज की गई।
कम दबाव के तंत्र से राहत
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अगर मानसून के दौरान बने कम दबाव वाले तंत्र नहीं होते तो बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। इस सीजन में 14 कम दबाव वाले तंत्र बने और उनसे जुड़े 77 दिन दर्ज किए गए, जबकि सामान्य तौर पर ऐसे 57 दिन होते हैं।
ओडिशा है अपवाद, जहां रिकॉर्ड बारिश हुई
देश के कई हिस्से जहां सूखे की चपेट में थे, वहीं ओडिशा में पिछले 20 वर्षों की सबसे अधिक बारिश (1,480 मिमी से अधिक) दर्ज की गई। यह 1901 के बाद से राज्य की 5 सबसे अधिक बारिश वाले मानसूनी वर्षों में से एक है।