Giridhar Aramane, Irineo Cruz Espino
- फोटो : एएनआई
भारत ने फिलीपींस को भारतीय रक्षा उद्योग के साथ मिलकर सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। इसकी जानकारी रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने मनीला में आयोजित भारत-फिलीपींस संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की पांचवीं बैठक में दी। उन्होंने बताया कि भारत अपनी रक्षा निर्माण क्षमताओं को बढ़ा रहा है और विभिन्न देशों को सैन्य हार्डवेयर का निर्यात कर रहा है।
दोनों पक्षों ने 'व्हाइट शिपिंग' के क्रियान्वयन और मनीला स्थित भारतीय दूतावास में एक रक्षा शाखा खोलने के फैसले का स्वागत किया। व्हाइट शिपिंग से मतलब ऐसी व्यवस्था से है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के लिए सूचना साझा की जाती है। यह सूचना समुद्री यातायाता की निगरानी और सुरक्षा में मदद करती है। इन पहलों का मुख्य मकसद भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा और सामरिक साझेदारी को बढ़ाना है। यह खासकर चीन की दक्षिण चीन सागर में आक्रामक गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
अरमाने ने फिलीपींस की सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के प्रयासों की सराहना की और भारत के आत्मनिर्मभर भारत के दृष्टिकोण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण के तहत भारतीय रक्षा उद्योग अपनी निर्माण क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है और दुनियाभर में सैन्य उपकरणों का निर्यात कर रहा है। रक्षा सचिव ने फिलीपींस को भारतीय रक्षा उद्योग के साथ मिलकर सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन में भाग लेने का निमंत्रण दिया।
फिलीपींस ने दीर्घकालिक पूजीं भागीदारी के लिए निवेश की भी पेशकश की, जिससे आपूर्ति शृखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उसने भारत की रक्षा उद्योग के स्वदेशीकरण की सफलता की भी सराहना की। दोनों देशों ने अपने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
अरमाने ने फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्ट एदुआर्डो गेरार्दो कोजुआंगको टेओडोरो जूनियर से भी मुलाकात की। भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण रूप से बढ़े हैं। अप्रैल में भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप दी थी, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों को दर्शाता है। यह आपूर्ति दो साल पहले हुए 375 मिलियन डॉलर के सौदे के तहत की गई थी।