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भारत में कैसे बढ़ रहा गर्मी का प्रकोप: राजस्थान से ज्यादा UP के मैदानी इलाके क्यों गर्म, आगे क्या होगी स्थिति?

Sun, 26 Apr 2026 12:42 PM IST
Kirtivardhan Mishra स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शनिवार तक के आंकड़ों को देखा जाए तो दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 99 भारत के रहे। इनमें सबसे ज्यादा शहर उत्तर प्रदेश के रहे। वहीं, राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में अभी मैदानी इलाकों से कम ही गर्मी देखी गई है। अमर उजाला ने इस मामले में विशेषज्ञ से जाना कि आखिर इस स्थिति की वजह क्या है।
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जानकारी का स्रोत: AQI.in, आंकड़े शनिवार तक के। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत में गर्मी का प्रकोप जबरदस्त रूप से बढ़ा है। खासकर अप्रैल के बीते दो हफ्तों में पारा तेजी से चढ़ा है। स्थिति हर राज्य में खराब हुई है और उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत में तो मई शुरू होने से पहले ही लू का प्रकोप शुरू हो गया। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले तीन से चार दिन स्थिति कुछ ऐसी ही रहने वाली है। हालांकि, इसके बाद मौसमी प्रणालियों में बदलाव की वजह से कुछ राहत मिल सकती है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर शनिवार को भारत के सबसे गर्म शहर कौन से रहे? आखिर क्यों देश में अप्रैल के अंतिम पड़ाव में हीटवेव का अलर्ट जारी हुआ है? उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत में इतनी तीव्र गर्मी पड़ रही है? पूर्वोत्तर, मध्य और दक्षिण भारत की गर्मी से यह किस तरह अलग है? आगे गर्मी की स्थिति कैसी रहने वाली है? आइये जानते हैं...

शनिवार को दुनिया के टॉप गर्म शहर

  • शनिवार तक के आंकड़े देखे जाएं तो सामने आता है कि शीर्ष-100 गर्म शहरों में भारत के 99 शहर शामिल हैं। 
  • सिर्फ टॉप-25 गर्म शहरों की ही बात कर लें तो इसमें से 24 शहर उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि एक शहर उत्तराखंड का है। 
  • टॉप-50 में 32 यूपी के, नौ बिहार के, तीन उत्तराखंड के, दो महाराष्ट्र के, एक मध्य प्रदेश का, एक राजस्थान, एक गुजरात और एक नेपाल का शहर है।

क्या होती है हीटवेव, अप्रैल के अंत में इसका प्रकोप क्यों?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) लगातार भारत में गर्मी की स्थिति को लेकर अलर्ट और दिशा-निर्देश जारी कर रहा है। अपनी हालिया एडवायजरी में मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) जैसी स्थिति बनने की चेतावनी जारी की है। यह हीटवेव की स्थिति तब होती है, जब किसी क्षेत्र में सामान्य अपेक्षित तापमान के मुकाबले में तापमान असामान्य रूप से ज्यादा हो जाए। 

कब घोषित की जाती है 

मैदानी इलाकों में: अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और यह सामान्य तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस से 6.4 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है। 6.4 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने पर इसे 'गंभीर हीटवेव' माना जाता है। 

तटीय क्षेत्रों में: तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है।

पहाड़ी इलाकों में: तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है।

अप्रैल के अंतिम दो हफ्तों में इसका प्रकोप क्यों?

अप्रैल के अंत और मई के महीने में इसके बढ़ते प्रकोप के पीछे कई बड़े वायुमंडलीय और स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं।

एंटीसाइक्लोन और हीट डोम: हीटवेव मुख्य रूप से उच्च दबाव वाली प्रणालियों (एंटीसाइक्लोन) के कारण होती है। यह प्रणाली गर्म हवा को नीचे की ओर दबाती है और बादलों को बनने से रोकती है, जिससे आसमान साफ रहता है और सूरज की सीधी गर्मी सतह पर पड़ती है। यह एक तरह का हीट डोम बना देता है जो गर्म हवा को बाहर निकलने से रोकता है।

शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं: पाकिस्तान की तरफ से आने वाली शुष्क और गर्म उत्तर-पश्चिमी हवाएं मैदानी इलाकों में तापमान को तेजी से बढ़ाती हैं। 

कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और अल नीनो: इस साल सर्दियों और वसंत में बारिश की कमी (कमजोर पश्चिमी विक्षोभ) ने प्राकृतिक रूप से मिलने वाली ठंडक को खत्म कर दिया है। इसके अलावा, अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमजोर होता है और तापमान में बढ़ोतरी होती है।

स्थानीय भूमि-वायुमंडलीय अंतःक्रिया: आईआईटी बॉम्बे के एक शोध के अनुसार, केवल दूर से आने वाली हवाएं ही नहीं, बल्कि स्थानीय सतह का अत्यधिक गर्म होना और हवा का दबाव गर्मी को बढ़ाने और हीटवेव के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

शहरों का गर्म द्वीप में बदलना: शहरों में मौजूद कॉन्क्रीट, डामर और गगनचुंबी इमारतें दिन की गर्मी को सोख लेती हैं और रात में भी इसे रोक कर रखती हैं। इसके कारण रातें भी गर्म हो रही हैं, जिससे इंसान के शरीर को दिन की भीषण गर्मी के बाद रात में ठंडा होने का मौका नहीं मिल पाता है।

बढ़ती नमी: दूसरी ओर तटीय और कुछ अन्य क्षेत्रों में प्री-मानसून बौछारों या नमी के कारण नमी वाली लू (मॉइस्ट हीटवेव) बनती है। जब उच्च तापमान के साथ नमी मिल जाती है, तो इंसान का पसीना नहीं सूख पाता, जो इस गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना देता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन्हीं मौसमी प्रणालियों और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले प्रभाव के कारण अप्रैल के अंत तक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान और कई अन्य मैदानी, तटीय क्षेत्रों में लू के दिन सामान्य से ज्यादा हो गए हैं।

क्यों राजस्थान जैसे रेतीले इलाकों से ज्यादा गर्मी उत्तर प्रदेश, बिहार के मैदानी इलाकों में?

मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिल श्रीवास्तव के मुताबिक, राजस्थान के कुछ हिस्सों की तुलना में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे मैदानी इलाकों में ज्यादा गर्मी (उच्च तापमान) होने का मुख्य कारण विंड फील्ड यानी हवाओं की दिशा और प्रकार है। उन्होंने इसके पीछे मुख्य तौर पर दो कारण बताए हैं...

शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं: पाकिस्तान की तरफ से आने वाली ये हवाएं बहुत अधिक शुष्क और गर्म होती हैं। जब ये हवाएं उत्तर प्रदेश और आसपास के मैदानी इलाकों से गुजरती हैं, तो यह हीट एडवेक्शन यानी गर्मी के प्रवाह का कारण बनती हैं, जिससे वहां का तापमान तेजी से बढ़ जाता है।

अरब सागर से आने वाली नमी: जब हवाओं की दिशा थोड़ी पश्चिमी या दक्षिण पश्चिम हो जाती है और वे अरब सागर के ऊपर से होकर आती हैं, तो वे अपने साथ थोड़ी नमी ले आती हैं। नम हवाओं की मौजूदगी में तापमान उतना अधिक नहीं बढ़ पाता जितना कि शुष्क हवाओं में बढ़ता है। 

यही कारण है कि राजस्थान के उत्तरी हिस्से जो सीधे पाकिस्तान की तरफ से आने वाली गर्म हवाओं की चपेट में होते हैं, में तापमान अप्रैल 2026 में ज्यादा देखा गया है। दूसरी तरफ मध्य और दक्षिणी राजस्थान में, जहां अरब सागर से आने वाली हवाओं का असर हो सकता है, तापमान अपेक्षाकृत थोड़ा कम है। इसके अलावा ट्रफ/चक्रवाती परिसंचरण ने भी मध्य और दक्षिण राजस्थान में तापमान को उत्तर के मुकाबले में कम रखा है। वहीं उत्तर प्रदेश जैसे राज्य इन शुष्क हवाओं के सीधे प्रभाव में आने के कारण भीषण गर्मी का सामना करते हैं।

क्या है भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति, आगे क्या?

1. उत्तर और मध्य भारत: भीषण शुष्क लू का क्षेत्र


मौजूदा स्थिति: उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और विदर्भ (महाराष्ट्र) लू की गंभीर चपेट में हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, वाराणसी और कई अन्य शहरों में तापमान 44-45 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया है। दिल्ली जैसे शहरों में भी तापमान 42-43 डिग्री के बीच बना हुआ है। 

राहत की उम्मीद: मौसम विभाग के मुताबिक, एक नए पश्चिमी विक्षोभ और हवा के दबाव में बदलाव के कारण, पहाड़ों और मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बन रही है। इसके प्रभाव से अगले दो-तीन दिनों के बाद उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लू के प्रकोप में कमी आने की उम्मीद है।

2. पूर्वी भारत: गंभीर हीटवेव अलर्ट

ओडिशा, गंगा के तट के करीब पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में लू का भारी असर देखा जा रहा है। अत्यधिक गर्मी को देखते हुए ओडिशा के कुछ जिलों (जैसे कालाहांडी, बलंगीर) में रेड अलर्ट जारी किया गया है और स्कूलों को बंद कर दिया गया है या उनके समय में बदलाव किया गया है।


3. तटीय और दक्षिण भारत जानलेवा नम वाली गर्मी

जहां उत्तर भारत शुष्क गर्मी से जूझ रहा है, वहीं केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तटीय महाराष्ट्र और ओडिशा के तटीय इलाकों में नम लू एक बड़ा संकट बन गई है। इन क्षेत्रों में उच्च तापमान के साथ-साथ अत्यधिक नमी के कारण वेट-बल्ब तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। नमी के कारण यहां का 38 डिग्री सेल्सियस तापमान भी शरीर को 48 डिग्री जैसा महसूस हो रहा है, क्योंकि पसीना नहीं सूखने से शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता।
 
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4. पूर्वोत्तर भारत: भारी बारिश के चलते राहत

देश के बाकी हिस्सों के उलट पूर्वोत्तर भारत- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, आदि में गर्मी का प्रकोप नहीं है। यहां व्यापक रूप से भारी बारिश, बिजली कड़कने और तेज हवाओं का दौर जारी है। इसके चलते यहां स्थिति उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत से बेहतर है। अगले कुछ दिन में यहां फिर बारिश का अनुमान है। 



(दुनिया में तापमान का स्रोत: AQI.in, आंकड़े शनिवार शाम 6 बजे तक; हर शहर का दिन का औसत उच्चतम तापमान)
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