शहरी विकास और मानव बस्तियों पर तीसरी संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में विभिन्न देशों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं की समीक्षा में भारत की स्थिति बहुत खराब बताई गई है। इस समीक्षा में बताया गया है कि पिछले 20 सालों से भारत ने शहरी विकास सूचकांक पर कोई सुधार दर्ज नहीं किया गया है।
तीसरी हैबिटेट प्रतिबद्धता सूचकांक की हाल में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थिति अन्य दक्षिण एशियाई देशों से काफी खराब है। दरअसल 1996 में इंस्तानबुल में हैबिटेट प्रतिबद्धता सूचकांक द्वितीय जारी किया गया तभी से यह उन देशों के प्रदर्शन को ट्रैक कर रहा है जो इस सूचकांकक के अनुरूप कार्य करने को प्रतिबद्ध हुए थे। इस सूचकांक में भारत की स्थिति पाकिस्तान, नेपाल से भी खराब है।