पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे। गलवां घाटी, पैंगोंग त्यो झील और हॉट स्प्रींग से पीछे हटने के वादे के बाद चीन कई तरह के नए पैंतरे अपना रहा है। पिछले तीन चार दिन से चीनी सेना तीनों जगहों से थोड़े सैनिकों को पीछे कर भारत को उलझाए रखते हुए अन्य साजो सामान और निर्माण संबंधी तैयारियां मजबूत कर रहा है।
इधर भारतीय सेना मिरर इमेज की रणनीति अपनाए हुए पूरी तरह तैयार है। यानि भारत की एलएसी के हरेक इलाके में चीनी सेना के बिल्कुल बराबर स्तर की तैनाती है। इधर दिल्ली में सेना और सरकार के शीर्ष अधिकारियों की बैठकें लगातार चल रही हैं।
उच्चपदस्त सैन्य सूत्रों के मुताबिक भारत 22 जून को दोनों देशों के कोर कमांडर की बातचीत में पीछे हटने पर बनी सहमति के बात एक हफ्ते तक चीनी हरकतों को भांप रहा है। यह काम कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर हो रहा है। अगले दो तीन दिनों में कोई ठोस सकारात्मक संकेत नहीं मिला तो भारतीय सेना अपने नए रंग दिखाएगा। हांलाकि किसी भी कार्रवाई से पहले भारत चीन के साथ एक और सैन्य स्तर की बातचीत के लिए तैयार है। इसके लिए चीनी समकक्ष को न्यौता भेजा गया है।
सूत्रों ने बताया कि डेपसांग के वाई जंक्शन पर चीनी सेना के किसी दुस्साहस का जवाब देने के लिए दो तरफा तैयारी है। इस तैयारियों को देखते हुए चीन फिलहाल पेट्रौलिंग प्लाइंट 10 (पीपी10) के पीपी 13 के बीच गश्त में कोई अड़चन नहीं लगा रहा। सामरिक लिहाज से डेपसांग काफी अहम है क्योंकि यहां से दौलत बेग ओल्डी, काराकोरम रोड और सियाचिन के रास्ते निकलते हैं।