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डब्ल्यूटीओ में भारत की दो टूक: चीन समर्थित IFD समझौते पर सख्त विरोध, नियमों में शामिल करने से किया साफ इनकार

Sat, 28 Mar 2026 11:37 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूटीओ की बैठक में भारत ने चीन समर्थित आईडीएफ समझौते पर कड़ा विरोध जताया। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इससे संगठन के मूल सिद्धांत कमजोर होंगे। भारत ने साफ किया कि वह ऐसे प्रस्ताव को नहीं मानेगा जो सभी देशों के हितों और समानता के सिद्धांत को प्रभावित करे।

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पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत ने शनिवार को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीन के नेतृत्व वाले ‘विकास के लिए निवेश सुविधा’ (आईएफडी) समझौते का जोरदार विरोध किया। भारत का कहना है कि इस समझौते को डब्ल्यूटीओ के नियमों में शामिल करने से संगठन के मूल सिद्धांत कमजोर पड़ सकते हैं। यह मुद्दा डब्ल्यूटीओ का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में उठाया गया, जो इस समय कैमरून के याउंडे शहर में चल रहा है। इस दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा कि भारत इस समझौते के पक्ष में नहीं है।

गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा कि आईएफडी समझौते को डब्ल्यूटीओ के ढांचे में शामिल करने से संगठन की कार्य करने की सीमाएं कम हो सकती हैं और इसके बुनियादी नियमों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरणा लेते हुए भारत ने सच के साथ खड़े रहने का फैसला किया और अकेले खड़े रहते हुए आईएफडी समझौते को डब्ल्यूटीओ ढांचे में शामिल करने से मना कर दिया। 

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नियमों में शामिल करने से साफ इनकार किया
कार्यक्रम के दौरान भारत ने खास तौर पर आईडीएफ को डब्ल्यूटीओ के नियमों में ‘Annex 4’ के तहत शामिल करने से साफ मना कर दिया।। Annex 4 में ऐसे समझौते आते हैं जो सभी देशों पर लागू नहीं होते, बल्कि केवल उन देशों पर लागू होते हैं जो उन्हें मान लेते हैं।  बता दें कि आईडीएफ एक ऐसा प्रस्ताव है, जिसे 2017 में चीन और कुछ अन्य देशों ने शुरू किया था। इसका मकसद निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन भारत को लगता है कि इससे सभी देशों के लिए बराबरी का माहौल नहीं रहेगा।

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क्या कहना है भारत का, समझिए
इस पूरे मामले में भारत ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वह डब्ल्यूटीओ में सुधार को लेकर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी नए समझौते को लागू करने से पहले उसके नियम, सुरक्षा और प्रभाव पर पूरी तरह चर्चा होनी चाहिए। गौरतलब है कि इससे पहले डब्ल्यूटीओ के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भी भारत ने इस आईएफडी समझौते का कड़ा विरोध किया था और अब एक बार फिर इसका सख्त विरोध कर भारत ने संदेश दिया है कि वह ऐसे किसी भी समझौते का समर्थन नहीं करेगा, जो डब्ल्यूटीओ के नियमों और सभी देशों के बराबरी के अधिकारों को कमजोर करता हो।
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