गृह मंत्रालय ने न्यू यार्क के संचालित संगठन सिख फॉर जस्टिस को गैर कानूनी घोषित करते हुए उसपर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्रालय के मुताबिक यह संगठन खालिस्तान के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था जिससे खासतौर पर पंजाब की हालत बिगड़ रही थी। सरकार ने यह फैसला देश के कई सिख संगठनों से विचार विमर्श के बाद लिया है।
अलगाववाद एजेंडे के चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। अप्रैल में मोदी सरकार के अनुरोध पर पाकिस्तान ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। इससे पहले कई बार आईएसआई द्वारा इस संगठन के जरिए पंजाब में माहौल बिगाड़ने की खबरें सामने आ चुकी हैं।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन में रहने वाले इस संगठन के सदस्यों पर यूएपीए एक्ट के तहत प्रतिबंधित किया है। इनके कई सोशल मीडिया हैंडल भी ब्लॉक किए गए हैं।
रक्षा एजेंसियों ने लंबे समय से खालिस्तान ग्रुप सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी हुई थीं। आरोप था कि यह संगठन खालिस्तान जनमत संग्रह में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को मुफ्त हवाई टिकट दे रहा था। उधर, गृह मंत्रालय के सूत्र की मानें तो वांटेड खालिस्तानी आतंकवादी परमजीत सिंह पम्मा को भारत-इंग्लैंड विश्व कप मैच के दौरान देखा गया था। वह सिख फॉर जस्टिस से भी जुड़ा हुआ है।
यह संगठन अपने अलगाववादी विचारधारा के प्रचार के लिए करतारपुर कॉरिडोर का उपयोग करना चाहता था। इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि पाक ने समूह पर अंकुश लगाया है या प्रतिबंध लगाया है। 14 तारीख को करतारपुर वार्ता के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुरक्षा के संबंध में भारत द्वारा मुद्दा उठाए जाने की संभावना है।
गुरपतवंत और परमजीत मुख्य कर्ताधर्ता
गुरपतवंत सिंह पन्नू और परमजीत सिंह इस संगठन का मुख्य कर्ताधर्ता है। इनके अलावा संगठन को 10 कायकर्ता और हैं जिनकी पहचान कर ली गई है। भारतीय एजेंसियों ने इस संगठन पर 11 अलग अलग मामले दर्ज कर रखे हैं।
यह संगठन 20-20 रिफरेंडम के लिए ऑनलाइन समर्थकों को जुटा रहा था। ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिख बहुल इलाकों खालिस्तान के समर्थन में यह संगठन जोर शोर से काम कर रहा था। इसका दावा है कि इसके रिफरेंडम के दस लाख से भी ज्यादा समर्थक हैं।
सरकार को खुफिया जानकारी मिली थी कि इस संगठन के परमजीत सिंह पम्मा नाम के कार्यकर्ता ने 30 जून को भारत इंग्लैंड वल्र्ड कप मैच में खालिस्तान का टी-शर्ट पहन कर उसकेसमर्थन में नारे लगाए थे। इस संगठन ने पुलवामा वारदात को भी आतंकी हमला करार देने से इनकार कर दिया था।
जानकारी के मुताबिक यह संगठन नए बन रहे करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बहाने पाकिस्तानी एजेंसियों से संपर्क साधने में जुटा था। इसके अलावा पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई सिख फॉर जस्टिस समेत कई गुप्त संगठनों को खालिस्तान आंदोलन को फिर से जिंदा करने की साजिश पर लंबे समय से काम कर रहा है।