भारत और बहरीन ने सोमवार को एक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते कॉम्प्रेहंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी सीईपीए के लिए वार्ता शुरू करने की घोषणा की। दोनों देशों ने निवेश समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी अहम प्रगति दर्ज की है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल जयानि के बीच हुई विस्तृत वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक बनाने पर सहमति बनी।
वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने दोहरा कराधान से बचाव समझौते (डीटीएए) पर बातचीत शुरू करने की दिशा में कदम उठाने का निर्णय लिया। इस समझौते से व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा कंपनियों को कर संबंधी निश्चितता प्राप्त होगी। अधिकारियों के मुताबिक, यह समझौता भारतीय और बहरीनी निवेशकों के बीच कारोबारी सहयोग को मजबूती देगा। दोनों देशों ने व्यापार को इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम, खाद्य प्रसंस्करण, धातु और आभूषण जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने पर सहमति जताई।
रणनीतिक सहयोग पर चर्चा
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के दौरान गाजा शांति योजना के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया और उम्मीद जताई कि यह पहल पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थायी समाधान लाएगी। दोनों नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, फिनटेक और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। पिछले महीने भारतीय नौसेना के तीन जहाजों की बहरीन यात्रा का उल्लेख करते हुए दोनों पक्षों ने रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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आतंकवाद पर साझा रुख
भारत और बहरीन ने सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए उसे मानवता के लिए खतरा बताया। दोनों देशों ने विशेष रूप से 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की और पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। साथ ही, आतंकवाद से निपटने के लिए खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
आर्थिक रिश्तों का नया अध्याय
भारत और बहरीन के बीच व्यापारिक संबंध हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़े हैं। वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 1.64 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। बहरीन में करीब 3.32 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं। भारत, बहरीन के शीर्ष पांच व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलने के लिए संयुक्त कार्य समूह स्थापित करेंगे।