दुनियाभर में रैनसमवेयर के बढ़ते खतरे के बीच भारत अब इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएगा। अमेरिका ने बुधवार को इंटरनेट के जरिए धन उगाही को लेकर 30 देशों की बैठक बुलाई है, जिसमें चार देशों ने चार अहम मुद्दों पर अलग-अलग बैठक और चर्चा कराने का जिम्मा लिया है। इनमें भारत का नाम भी शामिल है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जर्मनी भी रैनसमवेयर के खतरे से निपटने के लिए नीति को सामने रखेंगे।
रैनसमवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर हैं, जो लूटपाट और धोखाधड़ी के इरादे के साथ बनाए जाते हैं और किसी कंप्यूटर सिस्टम पर हमला करते हैं। दुनिया में इस वक्त बड़ी संख्या में हैकर्स और आतंकी संगठन धन उगाही के लिए रैनसमवेयर के जरिए संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं और इन जानकारियों को वापस करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट करने की मांग करते हैं।
अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने रैनसमवेयर के इसी खतरे से निपटने के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक में विषय आधारित चर्चा के आयोजन के लिए 30 से ज्यादा देशों को न्योता दिया है। इसमें साइबर दुनिया की चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए चार चरणों वाली रणनीति पर विचार किया जाएगा।
इस बैठक में यूरोपीय संघ के अधिकारियों के अलावा कई और देशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं। इस बैठक का मकसद रैनसमवेयर से निपटने के लिए आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है। यह इस साझा खतरे से निपटने के लिए साझेदारों और सहयोगियों को एकजुट करने का अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रयास है।
बाइडन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इस बैठक का आयोजन भले अमेरिका कर रहा हो लेकिन हम इसे अकेले अमेरिका की पहल के रूप में नहीं देखते। निश्चित ही हम अन्य देशों को भी इस उद्देश्य के लिए साथ ला रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बैठक के आयोजन में कई सरकारों का सहयोग रहा खासकर चार देशों ने विषय आधारित विशेष चर्चा के लिए स्वेच्छा जताई जिनमें भारत ने लचीलापन, ऑस्ट्रेलिया ने अवरोध, ब्रिटेन ने वर्चुअल करंसी और जर्मनी ने कूटनीति विषय को चुना।’’
दो दिवसीय बैठक में भाग लेने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, बल्गेरिया, कनाडा, चेक गणराज्य, डोमिनिक गणराज्य, एस्टोनिया, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, भारत, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, जापान, केन्या, लिथुआनिया, मैक्सिको, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, पोलैंड, कोरिया गणराज्य, रोमानिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन शामिल हैं।