भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर आतंक के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया है। विदेश सचिव हर्ष शृंगला ने कहा कि टेक्सास में आराधना स्थल पर किया गया हमला आतंक के वैश्विक नेटवर्क का सुबूत है। इससे साफ है कि इसका केंद्र भारत के पड़ोस में है। आतंक के वैश्विक नेटवर्क के खिलाफ कड़ी और सामूहिक कार्रवाई जरूरी है।
‘भारत-प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत-यूरोप/जर्मनी सहयोग की संभावना’ विषय पर संगोष्ठी में शृंगला ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि टैक्सास हमला बताता है कि हमारे पड़ोस में स्थित आतंक का केंद्र बेहद सक्रिय है और इसका प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।
इसके खिलाफ स्पष्ट, अविभाजित, प्रभावी और सामूहिक प्रतिक्रिया की जरूरत है। आतंकवाद से निपटने के लिए भारत रणनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर सकता है। आतंक के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में विफलता इसे और बढ़ाने का ही काम करेगी। आप इसके लिए मुंबई आतंकी हमले का उदाहरण ले सकते हैं, जहां जर्मनी और अन्य देशों के नागरिकों को भी जान गंवानी पड़ी थी।
विदेश सचिव ने बताया कि भारत इस साल तीसरी ‘नो मनी फॉर टेरर’ कॉन्फ्रेंस का आयोजन करेगा। हमें उम्मीद है कि जर्मनी इसमें भाग लेगा। उन्होंने भारत और यूरोप के बीच सतत विकास, पर्यावरण रक्षा, मौसम में बदलाव, देशों को आर्थिक निर्भरता और ऋण जाल में न फंसने देने के लिए मिलकर काम करने की संभावना बताई।
यह था टेक्सास आतंकी हमला
अमेरिका के टेक्सास में स्थित एक आराधना स्थल में घुसकर 44 साल के मलिक फैसल अकरम ने चार लोगों को बंधक बना लिया था। वह अमेरिकी जेल में 86 साल की सजा काट रही पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट आफिया सिद्दीकी की रिहाई की मांग कर रहा था। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसे आतंकी कार्रवाई करार दिया था। सुरक्षा बलों ने 16 जनवरी को अकरम को मार गिराया था।