Independence Day: BSF Constable Sudip Sarkar
- फोटो : Amar Ujala
शहीद सुदीप सरकार
वर्ष 2020 के दौरान सात-आठ नवंबर की रात को बीएसएफ की एक 'एंबुश' टीम घुसपैठ-रोधी बाधा प्रणाली 'एआईओएस' के साथ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में एलओसी पर गश्त के लिए निकली थी। इस टीम में सिपाही सुदीप सरकार 169 बटालियन, एसआई अनुराग रंजन और हवलदार अब्दुल हमीद, शामिल थे। सुदीप सरकार इस टीम को गाइड कर रहे थे। उन्होंने सशस्त्र घुसपैठियों को एआईओएस की ओर बढ़ते हुए देखा। पहले से छिपे बैठे आतंकियों को मालूम हो गया था कि बीएसएफ की टीम उनकी ओर बढ़ रही है। कुछ ही देर बाद आतंकवादियों ने रिज से फायरिंग शुरू कर दी। चूंकि आतंकी ऊंचाई पर बैठे थे, इसलिए वे खुद को सुरक्षित मान रहे थे। वे भारी मात्रा में गोलाबारी कर रहे थे। ऐसी स्थिति में बिना किसी सुरक्षा कवर के सुदीप सरकार, आगे बढ़ने लगे। उन्होंने बहादुरी से आतंकियों का मुकाबला किया।
ऊंचाई पर बैठे होने का फायदा उठा रही थी आतंकी टोली
सुदीप ने काफी देर तक आतंकियों को फायरिंग में उलझाए रखा। आतंकी, केवल गोलियां ही नहीं चला रहे थे, बल्कि उन्होंने बीएसएफ के दल पर हैंडग्रेनेड भी फेंकने शुरू कर दिए। इस बीच सुदीप सरकार को गोली लग गई। आतंकियों की टोली, ऊंचाई पर बैठे होने का फायदा उठा रही थी, इसलिए उन्होंने सामने से फायर न कर, कई तरफ से गोलीबारी कर दी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद सुदीप सरकार ने आतंकियों को जवाब देना जारी रखा। सुदीप, एक साहसी क्वार्टर बैटल में शामिल हो चुके थे। इस हमले में एक आतंकवादी मारा गया। खून बहुत ज्यादा बह चुका था और सुदीप लड़ रहे थे। उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। सुदीप सरकार को उनकी विशिष्ट वीरता, निस्वार्थता और निडरता प्रदर्शित करने के लिए कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया है।
Independence Day- BSF Officer SI Paotinsat Guite
- फोटो : Amar Ujala
शहीद पाओतिनसैट गुइटे
30 नवंबर, 2020 को, बीएसएफ के एसआई पाओटिनसैट गुइटे के नेतृत्व में 59 बटालियन का घातक दस्ता एलओसी के निकट उस जगह पर तैनात था, जहां से आतंकियों के घुसपैठ करने की अधिक संभावना थी। यह दस्ता 24 घंटे की ड्यूटी पर था। गुइटे, दुश्मन की रणनीति से परिचित थे। वे हर पल आतंकियों पर नजर रख रहे थे। ये दुर्गम और अत्यधिक संवदेनशील इलाका, भारतीय सेना के नियंत्रण में था। एक दिसंबर को दमईकुश नाला (पाक साइड) दिशा से बीएसएफ दल पर फायरिंग की गई। बीएसएफ ने भी जवाबी फायरिंग की। एसआई पाओतिनसैट गुइटे, ने अपनी रणनीति से आतंकियों को करारा जवाब देकर स्थिति पर तत्काल नियंत्रण कर लिया। बीएसएफ दल, दोबारा से घात लगाकर बैठ गया। हालांकि इस बीच आतंकवादियों द्वारा लगातार फायरिंग की जा रही थी। भारी खनन वाले इलाके में वनस्पति नहीं थी। विपरित दिशा से एक गोली पाओटिनसैट गुइटे, के ऊपरी हिस्से में लगी।
घायल थे, मगर दुश्मन को भारी गोलाबारी में उलझाए रखा
इसके बावजूद गुइटे ने अपनी जान की परवाह नहीं की। अपनी टीम का सुरक्षा कवच बनते हुए उन्होंने दुश्मन को भारी गोलाबारी में उलझाए रखा। इतना ही नहीं, इस गोलीबारी में एक आतंकी मारा गया। उन्होंने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया और एक आतंकवादी को सफलतापूर्वक मार गिराया। गुइटे का बहुत ज्यादा खून बह चुका था। आतंकियों की भारी गोलीबारी के बीच उन्हें इन्फैंट्री सेफ लेन (आईएसएल) के माध्यम से बाहर निकाला गया। चिकित्सा अधिकारी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पाओतिनसैट गुइटे ने ड्यूटी के दौरान राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। पूरे ऑपरेशन के दौरान, गुइटे के गतिशील नेतृत्व में हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकवादी मारे गए थे। विशिष्ट वीरता, निडरता और स्वयं के जीवन की परवाह न कर गुइटे द्वारा दिए गए अदम्य साहस के परिचय को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया है।