दुनियाभर के 51 फीसदी लोग कार से यात्रा करना पसंद करते हैं। अमेिरका और कनाडा में ऐसे लोगों की संख्या करीब 92 प्रतिशत है। वहीं, उत्तरी और दक्षिणी यूरोपीय शहरों में कार से यात्रा करने वाले 50 से 75 फीसदी तक है। जबकि भारत सहित एशियाई देशों में बाइक, साइिकल और पैदल चलने को ज्यादा महत्व देते हैं।
शोधकर्ताओं ने कारों पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इनके चलन से उत्पन्न शोर, प्रदूषित गैसें और सेहत के लिए हानिकारक जहरीली सामग्री की तादात भी बढ़ रही है। कॉम्प्लेक्सिटी साइंस हब के राफेल प्रीतो क्यूरियल और ईएएफआईटी विश्वविद्यालय ने ‘कारों पर निर्भरता’ विषयक नए अध्ययन में यह खुलासा किया है। एनवायरनमेंट इंटरनेशनल पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने 61 देशों के 794 शहरों में यातायात के साधनों पर आंकड़े एकत्रित किए। इनकी कुल आबादी लगभग 85 करोड़ है।
जहां कारें अधिक वहां समस्याएं भी बहुत
अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि जिन शहरों में कारें अधिक है वहां समस्याएं भी बहुत हैं। मसलन, कारों का बढ़ता बोझ, महंगा पेट्रोल, पार्किंग की समस्या, कार चलाने से उत्पन्न शोर, प्रदूषित गैसें और सेहत के लिए हानिकारक सामग्री की तादात भी बढ़ रही है। साथ ही दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
भारत में बाइक, साइकिल और पैदल चलने पर महत्व
अध्ययन के अनुसार दक्षिण और पूर्वी एशिया में यात्राओं में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी जयादा है। यहां भीड़भाड़ वाले बड़े शहरों में बाइक और साइकिल के अलावा पैदल चलने को महत्व दिया जाता है। इनमें हांगकांग में 77, दक्षिण कोरिया के सियोल 66, भारत के मुंबई में 52 और जापान के टोक्यो में 51 फीसदी लोग बाइक का प्रयोग करते हैं। इसके अलावा दक्षिणी और पूर्वी एशिया में लोग साइकिल चलाना और पैदल चलना ज्यादा पसंद करते हैं।
यूरोप के बड़े शहरों में लोग कारों पर बहुत अधिक निर्भर
यूरोप के बड़े शहरों में कारों का बोलबाला है। कुछ शहर कारों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। जैसे रोम, इटली में 66, इंग्लैंड का मैनचेस्टर 71, डेनमार्क का कोपेनहेगन 77, नीदरलैंड का यूट्रैक्ट 75, स्पेन का बिलबाओ 66 और इटली का बोलजानो 58 फीसदी तक कारों पर निर्भर है।
इलेक्ट्रिक कारों का चलन अंतिम विकल्प नहीं
शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद चेताया कि यह शहरों के लिए अंतिम और आकर्षक विकल्प नहीं हैं। क्योंकि निर्माण, बुनियादी ढांचे की मांग, भीड़, टायरों से उत्पन्न प्रदूषण कणों को ध्यान में रखकर नीति बनानी चाहिए।