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त्रिपुरा हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए के तहत आरोपी बनाए गए दो वकीलों और एक पत्रकार की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

Wed, 17 Nov 2021 12:54 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

त्रिपुरा में अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थलों के खिलाफ कथित हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर उच्चतम न्यायालय के वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत 102 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट में एक अपंजीकृत संस्था 'वी द वीमेन ऑफ इंडिया 'की तरफ से याचिका दायर की गई है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को त्रिपुरा हिंसा में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी बनाए गए दो वकीलों और एक पत्रकार की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला सुनाया। इसी के साथ कोर्ट ने मामले में त्रिपुरा पुलिस से यूएपीए लगाने के लिए जवाब भी मांगा है। 
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हाल ही में त्रिपुरा में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। स्थिति नियंत्रण में आने के बाद त्रिपुरा पुलिस ने हिंसा के बारे में अपनी सोशल मीडिया पोस्ट से कथित रूप से सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट के चार वकीलों को गिरफ्तार कर लिया था। इनके खिलाफ सख्त यूएपीए और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसी मामले में दो वकीलों- मुकेश कुमार, अंसारुल हक अंसारी और एक पत्रकार- श्याम मीरा सिंह ने यूएपीए के कठोर प्रावधानों के तहत दर्ज आपराधिक मामले रद्द करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते ही उनकी याचिका पर सुनवाई पर सहमति जता दी थी। 
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गौरतलब है कि त्रिपुरा में अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थलों के खिलाफ कथित हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर उच्चतम न्यायालय के वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत 102 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

सिविल सोसायटी सदस्यों पर कठोर कार्रवाई न करे पुलिस : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा हिंसा मामले में पुलिस को एक पत्रकार सहित सिविल सोसायटी के तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। इनके खिलाफ यूएपीए की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने राज्य में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित हिंसा के तथ्य सोशल मीडिया पर उजागर कर रहे हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने वकील मुकेश व अंसारुल हक और पत्रकार श्याम मीरा सिंह की याचिका पर पुलिस को यह निर्देश दिए हैं। उन्होंने यूएपीए कानून के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी है।

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा से भड़की त्रिपुरा में आग
पड़ोसी बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद ने त्रिपुरा में रैली निकाली थी। इसी दौरान हालात बिगड़ गए और आगजनी, लूटपाट और हिंसा की घटनाएं हुईं। कुछ रिपोर्ट्स में तो यहां तक सामने आया था कि एक मस्जिद में तोड़फोड़ के साथ कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि, पुलिस ने ऐसी घटनाओं को नकार दिया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 36 भड़काऊ पोस्ट हटाने को कहा
बस बीच साइबर सिक्योरिटी और जांच के लिए राज्य की नोडल एजेंसी महाराष्ट्र साइबर ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से त्रिपुरा की कथित सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित 36 पोस्ट हटाने को कहा है। पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के अमरावती, नांदेड़, मालेगांव (नासिक), वाशिम और यवतमाल जैसे स्थानों पर कुछ संगठनों की त्रिपुरा हिंसा के खिलाफ आयोजित रैलियों के दौरान पथराव की घटनाएं हुई थीं। सोशल मीडिया पर नजर रखने वाली महाराष्ट्र साइबर ने इसके बाद 36 भड़काऊ पोस्ट की पहचान की थी। इनमें सबसे ज्यादा 25 ट्विटर, 6 फेसबुक और 5 इंस्टाग्राम पर थीं। ये सभी 12 से 15 नवंबर के बीच पोस्ट की गई थीं।
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