विवादास्पद मुद्दों के हल केलिए भारत और पाकिस्तान के समग्र वार्ता के मेज पर आने से पहले ही दोनों देशों के बीच नए सिरे से कूटनीतिक जंग के आसार बन गए हैं। वार्ता की मेज पर आने से पहले आनन-फानन में रॉ का एजेंट बता कर हुई कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी, संयुक्त राष्ट्र में पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर के बचाव केलिए पाकिस्तान और चीन की जुगलबंदी और इस हमले की जांच केलिए भारत आई पाकिस्तानी जांच टीम के हवाले से पुख्ता सबूत न होने संबंधी मीडिया रिपोर्ट पर भारत चिंतित है। भारत को फिलहाल जाधव और पठानकोट हमला मामले में पाकिस्तान के आधिकारिक रुख का इंतजार है। विदेश मंत्रालय ने फिलहाल मसूद अजहर के मामले में गहरी निराशा जाहिर की है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख सकारात्मक नहीं रहा तो दोनों देशों के बीच नए सिरे से कूटनीतिक तनातनी शुरू हो सकती है।
विदेश मंत्रालय के सूत्र का कहना है कि पठानकोट आतंकी हमला मामले में पाकिस्तान की जांच टीम को कई पुख्ता और अकाट्य सबूत दिए गए हैं। जांच के दौरान पाकिस्तानी टीम ने हमले में अपने नागरिक के होने की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार की है। ऐसे में अगर पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर सबूतों को कार्रवाई के लिए नाकाफी माना तो यह समझा जाएगा कि वह हमेशा की तरह बहानेबाजी पर उतर आया है।
सूत्र के मुताबिक रिश्ते सुधारने के सिलसिले में समग्र वार्ता की मेज पर पहुंचने से पहले जिस तरह से अचानक पाकिस्तान ने जाधव को गिरफ्तार किया उससे भारत का संदेह बढ़ा था। इसके बाद पाकिस्तानी मीडिया में जांच टीम के हवाले से भारत की ओर से पठानकोट मामले में पुख्ता सबूत उपलब्ध न कराए जाने की बात सामने आ रही है। अगर पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से भी यही स्टैंड लिया तो निश्चित रूप से बात बिगड़ेगी। भारत को इस बात की भी आशंका है कि अब तक सकारात्मक रुख अपना रही पाकिस्तानी सेना और आईएसआई अब फिर से नकारात्मक रुख अपना रही है।