देश में बढ़ते ओमिक्रॉन संकट के बीच कांग्रेस शासित राज्यों की मॉनिटरिंग की कमान अब सीधे दस जनपथ ने संभाल ली है। कोविड की संभावित तीसरी लहर के दौरान कांग्रेस शासित राज्यों के मैनेजमेंट पर किसी तरह के सवाल न खड़े हों और केंद्र कांग्रेसी सरकारों को कटघरे में न खड़ा करे, इसके लिए कोविड के मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व सक्रिय हो गया है। इस बीच पार्टी ने मोदी सरकार को घेरने के लिए एक रणनीति भी तैयार की है।
इसी सिलसिले में रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को फोन किया। आलाकमान ने राज्यों के सीएम को निर्देश दिया कि ओमिक्रॉन संक्रमण को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। आलाकमान ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे राज्य की जनता को बताएं कि उनकी पार्टी कोरोना संकट को लेकर ज़्यादा गंभीर और चिंतित है जबकि मोदी सरकार सिर्फ चुनावों में व्यस्त है और कोरोना काल के पिछले अनुभवों से सीख नहीं ले रही है।
कोरोना के मसले पर सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस पार्टी एक खास रणनीति तैयार कर रही है। इसमें वो मोदी सरकार पर कोरोना संकट से निपटने में दूरदर्शिता की कमी का आरोप अपने तथ्यों के साथ जनता के बीच लाएगी। पार्टी आम लोगों को बताएगी कि मोदी सरकार ने कोरोना को सही तरीके से हैंडल नहीं किया और समय रहते उचित कदम नहीं उठाए। इसकी वजह से कोरोना संक्रमण फिर से तेजी से फैल रहा है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी लोगों को ये भी बताएगी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 12 जनवरी 2020 को ही कहा था कि कोरोना एक बड़े संकट के तौर पर आ रहा है, लेकिन तब तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने जवाब दिया था कि राहुल देश को जबरन डरा रहे हैं। वहीं, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले ही सरकार को चेताया था कि कोरोना संकट आर्थिक सूनामी लेकर आएगा तब भी सरकार के मंत्रियों ने इसका मज़ाक उड़ाया और इसे गंभीरता से नहीं लिया था। जिन डॉक्टरों और सफाईकर्मियों को कोरोना वॉरियर्स बताकर ताली थाली बजवाई, वही अपने हितों पर कुठाराघात बता कर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।