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पाकिस्तान को भारत की चिट्ठी, आतंकवाद और पीओके पर होगी बात

Thu, 25 Aug 2016 08:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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अपने रुख पर कायम भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को चिट्ठी लिखकर कहा है कि बात होगी तो सिर्फ आतंकवाद और पीओके पर होगी। पाकिस्तान ने बीते पंद्रह अगस्त को भारत को अपनी दुस्साहस पूर्ण चिट्टी भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि वह जम्मू-कश्मीर और वहां के हालात को लेकर भारत से बातचीत के लिए तैयार है। इस पर भारत ने पाक को कड़ा जवाब दिया था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि पाक से बात होगी तो सिर्फ आतंकवाद पर लगाम लगाने और पीओके पर होगी। 
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अब एकबार फिर पाकिस्तान को लिखित में कहा गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और विदेश सचिव पाकिस्तान के साथ चल रहे भारत के गतिरोध और संबंधों पर कूटनीति रणनीतिक प्रतिक्रिया देने पर गहनता से लगे हुए थे। आखिरकार अजित डोवाल, सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों और गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई गोष्ठी के बाद पाकिस्तान को चिट्ठी भेजी गई।

भारत से भेजी गई चिट्ठी विदेश सचिव जयशंकर के पाकिस्तानी समकक्ष ऐजाज अहमद चौधरी को बुधवार रात को मिली। पाकिस्तान को भेजी गई चिट्ठी में वही शर्तें रखी गई हैं, जो 19 अगस्त को रखी गई थीं। इसमें कहा गया है कि भारत अपने रुख पर कायम है, भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की बात होगी और मुद्दा पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत तय करेगा।
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जयशंकर ने जवाबी पत्र में लिखा है कि वह पाकिस्तान आने के लिए तैयार हैं, मगर बातचीत का मुद्दा कश्मीर नहीं बल्कि वहां अशांति के लिए जिम्मेदार सीमापार आतंकवाद होगा। इसके अलावा जयशंकर ने यह भी पूछा है कि पाकिस्तान पीओके को कब खाली कर रहा है। बीते 16 जुलाई को भी विदेश सचिव ने पाकिस्तान की ओर से की गई वादाखिलाफी का जिक्र किया था। भारत पर युद्घ थोपने का आरोप लगाते हुए विदेश सचिव ने कश्मीर में होने वाली आतंकी घटनाओं में पाकिस्तान की भूमिका की भी याद दिलाई थी। इसके बाद पाकिस्तानी विदेश सचिव ने फिर से 19 जुलाई को पत्र लिख कर कश्मीर मामले में बातचीत करने की पेशकश के साथ जयशंकर को पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया था।
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कब खत्म होगा पाक का दुस्साहस?

- फोटो : file photo
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ मजबूर करना आसान नहीं होगा, क्योंकि पाक समर्थित आतंकवाद की कहानी छिपी नहीं है। कश्मीर में भी पाकिस्तान के घुसपैठियों की कमी नहीं है। 

समस्या का हल निकले इसलिए भारत ने यह जानते हुए चीन से दोस्ती का हाथ बढ़ाया कि उसने एनएसजी के लिए भारत का समर्थन नहीं किया था।

महीने भर पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आए थे, उनसे विदेश सचिव एस जयशंकर ने कई मुद्दों पर बात की थी, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मौलाना मसूद अजहर के बारे में भी बात हुई थी। भारत ने यह भी बताया था कि मसूद को अमेरिका ने आतंकी घोषित किया है। 
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