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Health: शराब ही नहीं, मोटापा-मधुमेह भी लिवर कैंसर के सबसे बड़े कारण, 66% मौतों के लिए गैर संचारी रोग जिम्मेदार

Sat, 28 Sep 2024 05:28 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

देश के प्रसिद्ध लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सरीन ने कहा कि अक्सर लोगों को लगता है कि शराब पीने वालों का लिवर खराब होता है जबकि इस सच के साथ दूसरा तथ्य यह भी है कि भारत में मोटापा भी लिवर को बीमार कर रहा है।
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डॉ. एसके सरीन - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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ज्यादा शराब पीने वालों में ही लिवर कैंसर नहीं होता है बल्कि मोटापा और मधुमेह भी इसके लिए जिम्मेदार है। 100 में लिवर कैंसर के 40 मरीजों में मोटापा तो 30 में मधुमेह को जिम्मेदार पाया गया है।

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यह जानकारी देते हुए देश के प्रसिद्ध लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सरीन ने कहा कि अक्सर लोगों को लगता है कि शराब पीने वालों का लिवर खराब होता है जबकि इस सच के साथ दूसरा तथ्य यह भी है कि भारत में मोटापा भी लिवर को बीमार कर रहा है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने देश भर में लिवर की बीमारियों को लेकर दिशा निर्देश लागू किए। इसके तहत सभी राज्यों में एक जैसा प्रोटोकॉल लागू होगा जिसके जरिये डॉक्टरों को बीमारी को जल्द पकड़ने में आसानी होगी।

10 में 3 लोगों का लिवर हो सकता है बीमार
वर्चुअल सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा कि भारत ने लिवर की बीमारियां और उनसे पीड़ित मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रहा है। मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग चयापचय संबंधी विकारों से जुड़े हैं।
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nएक अनुमान के मुताबिक 10 में से तीन लोगों में अगले कुछ साल बाद लिवर की बीमारी हो सकती है। इसलिए सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनके जरिए जिला स्तर पर मौजूद डॉक्टर इनका अध्ययन करने के बाद मरीजों की पहचान जल्द से जल्द करने में सक्षम होंगे।



देश में 66 फीसदी मौतों के लिए गैर संचारी रोग जिम्मेदार
नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंसेज (आईएलबीएस) के निदेशक डॉ. एसके सरीन ने कहा कि गैर-संचारी रोग (एनसीडी) जैसे मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर लिवर के स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं, जो स्वस्थ लिवर को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हैं। देश में 66% से अधिक मौतों के लिए गैर-संचारी रोग (एनसीडी) जिम्मेदार हैं।

  • वहीं गैर-एल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) की बात करें तो यह देश में लिवर रोग का एक महत्वपूर्ण कारण बनकर उभर रहा है। यह उम्र, लिंग, निवास क्षेत्र और सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर 9 से 32% तक आबादी में फैला हुआ है। उन्होंने यहां तक कहा कि पूरी दुनिया में गैर संचारी रोगों से ग्रस्त सबसे अधिक मरीजों की संख्या भारत में है और इसमें लिवर रोगियों का एक बड़ा अनुपात शामिल है।

30 फीसदी आबादी फैटी लिवर की चपेट में
डॉ. सरीन ने कहा कि भारत में अभी करीब 30 फीसदी आबादी फैटी लिवर की चपेट में है। ऐसे लोगों को अपनी परेशानियों पर नियंत्रण रखने के लिए मोटापा को कम करने के साथ साथ भोजन में करीब 60 फीसदी अन्नकूट रखना है। इसका मतलब है कि ऐसे फल जिनमें शुगर न हो, उनका सेवन काफी मात्रा में करें। अगर काॅफी या चाय की बात करें तो अभी तक के कुछ अध्ययन ऐसे हैं जिसमें कहा है कि कॉफी पीने से फैटी लिवर कम होता है। साथ ही लिवर कैंसर की आशंका भी कम होती है। हालांकि भारत में इसे ज्यादा बेहतर समझने के लिए बड़ी आबादी पर अध्ययन होना चाहिए।

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