कोलकाता की दुर्गापूजा विश्व प्रसिद्ध है। यूनेस्को ने भी इसकी भव्यता को देखते हुए मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में इसे शामिल किया। पूजा में अब केवल 12 दिन शेष बचे हैं, लेकिन इस बार लोगों में वो उत्साह और उमंग नहीं दिख रहा है। इसका कारण है आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी।
महिला सुरक्षा की थीम पर पंडाल
करीब 15 वर्षों से लाइट सज्जा में लगे तापस मंडल कहते हैं, हर पंडाल अपनी थीम से कुछ न कुछ संदेश दे रहा है। भले ही इस बार फिजा में मायूसी है, लेकिन लाइटिंग से जो कमाल किया जाता है, इसे ही देखने के लिए देश और दुनिया से लोग कोलकाता आते हैं। इस बार कई पूजा समितियों ने महिला सुरक्षा की थीम पर अपने पंडाल सजाने शुरू कर दिए हैं। कहीं पर सती प्रथा की थीम है तो कहीं पर बॉर्डर की समस्या दिखाई जा रही है। इसके अलावा समाज में बेटियों के साथ होती दरिंदगी, सामाजिक कुप्रथाओं पर आघात करने वाली थीम पंडालों में दिखाई देगी।
दुकानदारों को रौनक का इंतजार
दुर्गा पूजा के समय कोलकाता के बाजारों में जो उत्साह, उमंग रहता है वो इस बार नहीं दिख रहा, लेकिन दुकानदारों ने रौनक लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। 2022 में जहां इस दौरान करीब 38,000 करोड़ और 2023 में 80,000 करोड़ से अधिक का व्यापार हुआ था, वहीं इस बार क्या होगा इसे लेकर संशय बरकरार है।