हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं। यह कहावत दो चेहरों पर फिट बैठने वाली है। पहली उत्तराखंड के भावी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तो दूसरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर। धामी और मौर्य दोनों विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। लेकिन दोनों के रुतबे को लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व संवेदनशील है। यही वजह भी रही कि फूंक-फूंककर कदम रखने में माहिर पुष्कर सिंह धामी को दो बार दिल्ली बुलाकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने चर्चा की। राज्य के पर्यवेक्षक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को देहरादून में विधायक दल की बैठक के बाद राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम का एलान कर दिया।
शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत गोरखपुर के संघ कार्यालय माधव भवन में थे। होली के त्योहार के बाद संघ प्रमुख लोगों से मिल रहे थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश के निवर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच में करीब 40 मिनट की चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह से पहले संघ प्रमुख से हुई इस भेंट को बहुत अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसे योगी आदित्यनाथ के मजबूती से स्थापित होने के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा में यह चर्चा भी आम है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संघ प्रमुख मोहन भागवत का निरंतर स्नेह मिलता रहता है।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत होंगे तो मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन्द्र सिंह के हाथ में ही कमान बने रहने का निर्णय हुआ। एन बीरेन्द्र सिंह ने भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। इस तरह से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में लगातार दूसरी बार भाजपा ने सरकार बनाई। गोवा में तीसरी बार। इन चारों राज्यों में मुख्यमंत्री के पुराने चेहरे को बनाए रखा। गोवा में पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और एल मुरुगन की मौजूदगी में विधायकों ने सावंत को अपना नेता चुना। इसी तरह से मणिपुर की पर्यवेक्षक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रहीं, जबकि उत्तर प्रदेश में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ तमाम समीकरण दुरुस्त करने में व्यस्त हैं।