साल 2001 में कानपुर देहात के शिवली पुलिस स्टेशन के भीतर दिन-दहाड़े भगोड़े गैंगस्टर विकास दुबे ने भाजपा नेता संतोष शुक्ला की हत्या कर दी। इस घटना के चार महीने बाद दुबे ने कई राजनेताओं के साथ अदालत में आत्मसमर्पण किया। संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला ने उस दौरान की घटनाओं को याद करते हुए इस बात की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हत्या का आरोपी विकास दुबे जब अदालत में आत्मसमर्पण करने पहुंचा, तो उसके साथ कई नेता भी मौजूद थे।
मनोज ने बताया कि यह मेरे परिवार के लिए कुछ पहले झटकों में से एक था। इससे भी ज्यादा दुखद यह था कि इस हत्या के चश्मदीद गवाह 25 पुलिसकर्मी एक के बाद एक अदालत में गवाही देने से मुकर गए। उन्होंने बताया कि इस हत्या का जांच अधिकारी भी अदालत में अपने बयान से मुकर गया। इस तरह दुबे को बरी कर दिया गया।
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उन्होंने कहा कि अगर उन लोगों ने उस दौरान कोई स्टैंड लिया होता, तो बिकरू गांव में घटी घटना को रोका जा सकता था। साथ ही आठ पुलिसकर्मियों को शहीद नहीं होना पड़ता। उनके बयानों से विकास दुबे जेल जा सकता था, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ।
मनोज शुक्ला ने अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए इस केस को लड़ा। केस के सिलसिले में उन्होंने उस दौरान के जिलाधिकारी, विशेष अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। शुक्ला ने आरोप लगाया कि उस दौरान उन्हें किसी से भी मदद नहीं मिली।
लेकिन मनोज शुक्ला ने कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस अधिकारियों पर पूरा भरोसा है, जो अब आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए विकास दुबे को पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएंगे। उन्होंने कहा कि साल 2001 अलग था और 2020 अलग है। इस बार, मुझे पूरा यकीन है कि पुलिस उसे पकड़ लेगी।
कानपुर के अतिरिक्त महानिदेशक जय नारायण सिंह ने संतोष शुक्ला हत्याकांड से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे हैं, माना जा रहा है कि इस मामले को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने कानपुर देहात के पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स को विकास दुबे के पुराने मामलों को देखने के लिए कहा है।