सरकार की ओर से लाए जाने वाले प्रस्ताव पर सत्तारूढ़ राजग के कई सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सरकार की योजना प्रस्ताव पर सभी विपक्षी दलों के सांसदों का भी हस्ताक्षर कराने की है। इसके लिए सरकार जल्द ही विपक्षी दलों से बातचीत शुरू करेगी।
सरकारी आवास से जली नकदी का ढेर मिलने के कारण विवादों में घिरे हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ राज्यसभा की जगह लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। सरकार की ओर से लाए जाने वाले प्रस्ताव पर सत्तारूढ़ राजग के कई सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सरकार की योजना प्रस्ताव पर सभी विपक्षी दलों के सांसदों का भी हस्ताक्षर कराने की है। इसके लिए सरकार जल्द ही विपक्षी दलों से बातचीत शुरू करेगी।
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गौरतलब है कि कई विपक्षी दल चाहते हैं कि जस्टिस वर्मा के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ भी महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए। जस्टिस यादव पर नफरती भाषण देने का आरोप है। इस मुद्दे पर फिलहाल सरकार और विपक्ष में सहमति नहीं बन पाई है। गौरतलब है कि जस्टिस यादव के खिलाफ राज्यसभा में विपक्ष की ओर से पेश किया गया महाभियोग प्रस्ताव लंबित है। राज्यसभा सभापति का कार्यालय प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों के हस्ताक्षर का सत्यापन कराने में जुटा है।
प्रस्ताव लाने के लिए सौ सांसदों की जरूरत
सरकार की योजना पहले जस्टिस वर्मा के खिलाफ राज्यसभा में प्रस्ताव लाने की थी। हालांकि बाद में इसे लोकसभा में लाने पर सहमति बनी। इस प्रस्ताव के लिए लोकसभा में सौ और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। सरकार के सूत्र ने कहा कि योजना आम सहमति से प्रस्ताव लाने की है। इसके लिए विपक्षी नेताओं से जल्द ही बातचीत का सिलसिला शुरू होगा।
जस्टिस यादव मामले में नहीं बन रही सहमति
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर तो करीब-करीब आम सहमति है लेकिन जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर सत्तारूढ़ भाजपा सहमत नहीं है। सरकार का पक्ष है कि ये दोनों मामले अलग-अलग हैं। केंद्र सरकार का कहना कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों को सही माना है। इसके बाद उनके खिलाफ महाभियोग का रास्ता अपने आप ही बन जाता है। इसके उलट जस्टिस यादव के खिलाफ ऐसी कोई स्थिति नहीं है।