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WB: शपथ ग्रहण को लेकर गतिरोध, टीएमसी के दो विधायकों ने राज्यपाल का न्योता ठुकराया; विधानसभा में धरने पर बैठे

Wed, 26 Jun 2024 02:29 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

दोनों विधायकों के हाथों में तख्तियां देखा गया, जिसमें राज्यपाल से अनुरोध किया गया कि उन्हें निर्वाचित प्रतिनिधियों के तौर पर अपने कर्तव्यों को पूरा करने की अनुमति दी जाए।
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सीवी आनंद बोस - फोटो : ANI
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विस्तार
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शपथ ग्रहण को लेकर विरोध के बीच तृणमूल कांग्रेस के दो नवनिर्वाचित विधायक पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे। विधानसभा में उनसे चार बजे तक इंतजार करने को कहा गया। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि अगर चार बजे तक राज्यपाल शपथ दिलाने नहीं पहुंचे तो स्पीकर से शपथ दिलवाई जाएगी।

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दरअसल, सायंतिका बंदोपाध्याय और रयात हुसैन सरकार क्रमशः बारानगर और भागाबंगोला निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए हैं। राज्यपाल का इंतजार करते हुए दोनों विधायक वहीं धरने पर बैठ गए। बता दें कि राज्यपाल ने दोनों विधायकों को 26 जून को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। संवैधानिक नियमों के अनुसार, राज्यपाल विधायक को शपथ दिला सकते हैं। 
राज्यपाल के इंतजार में टीएमसी के दो विधायक
राज भवन की तरफ से बताया गया कि शपथ समारोह राज्यपाल सीवी आनंद बोस के समक्ष होना चाहिए। रयात हुसैन सरकार ने पत्रकारों के बात की। उन्होंने कहा, "हमने माननीय राज्यपाल से विधानसभा में आकर पद की शपथ दिलाने या अध्यक्ष को सौंपने का अनुरोध किया है। हालांकि, उन्होंने दोनों ही विकल्पों को नकार दिया। हम विधानसभा की सीढ़ियों पर उनका इंतजार कर रहे हैं।"

दोनों विधायकों के हाथों में तख्तियां देखा गया, जिसमें राज्यपाल से अनुरोध किया गया कि उन्हें निर्वाचित प्रतिनिधियों के तौर पर अपने कर्तव्यों को पूरा करने की अनुमति दी जाए। सायंतिका बंदोपाध्याय ने कहा, "हम बिना शपथ लिए विधायक के तौर पर काम नहीं कर सकते हैं।" उन्होंने बताया कि वे दोनों चार बजे तक राज्यपाल का इंतजार करेंगे।

विधानसभा स्पीकर ने दी प्रतिक्रिया

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विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "शपथ ग्रहण समारोह एक संवैधानिक प्रोटोकॉल है। यह बहुत दुर्भाग्य है कि हमें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अगर राज्यपाल चाहे तो विधानसभा में आकर शपथ दिला सकते हैं। इसके लिए हम सभी जरूरी इंतजाम करेंगे। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी भी प्रकार का कोई गतिरोध नहीं होना चाहिए।"

 

 

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