लॉकडाउन की वजह से 64 फीसदी तक कैंसर मरीजों के क्लेम में कमी आई है। वहीं सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों में 26 फीसदी कम प्रसूति हुई हैं। आयुष्मान भारत के तहत अस्पतालों से इन मरीजों के लिए किए जाने वाले क्लेम में कमी को देखते हुए गंभीर चिंता जताई गई है। एनएचए के मुताबिक, पहले से तय ऑपरेशन में 90 फीसदी की कमी आई है।
इस साल एक जनवरी से 2 जून तक की अवधि की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि लॉकडाउन से पहले हर सप्ताह प्रसूति के लिए करीब 3773 क्लेम मिल रहे थे जबकि लॉकडाउन के दौरान यह आंकड़ा 2680 तक पहुंचा है। प्राइवेट अस्पतालों की बात करें तो औसतन 472 मरीजों के पहले क्लेम मिलते थे लेकिन लॉकडाउन में 389 क्लेम मिले हैं। सी सेक्शन के प्रति सप्ताह सरकारी अस्पतालों से 3045 और प्राइवेट अस्पतालों से 783 क्लेम मिलते थे जोकि लॉकडाउन में क्रमश: 2322 और 620 दर्ज किए गए। इससे जाहिर है कि लॉकडाउन की अवधि में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी काफी प्रभावित हुई है। 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा देने वाली इस योजना के तहत 21 हजार से अधिक अस्पताल पैनल में जुड़े हैं। कैंसर के उपचार को लेकर ज्यादात्तर प्राइवेट अस्पताल हैं।