मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो)
देश में पीपीपी मॉडल के तहत चल रहे पांच आईआईआईटी संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने संबंधी प्रावधान वाला बिल लोकसभा में शुक्रवार को पारित हो गया। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां (संशोधन) बिल पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने ऐसे अनेक संस्थान खोलने और इसका शिक्षण स्तर आईआईटी की तर्ज पर करने का सुझाव दिया। मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सदस्यों के सुझावों पर अमल का आश्वासन दिया।
बिल पेश करते हुए निशंक ने बताया कि सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला और रायचूर में पीपीपी मॉडल के तहत शुरू किये गये इन आईआईआईटी संस्थानों में गुणवत्तपूर्ण शिक्षा दी जा रही है। इस समय 14000 बच्चे बीटेक और एमटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और इनका प्लेसमेंट स्तर 70 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार निकट भविष्य में ऐसे और संस्थान खोलेगी।
कांग्रेस सांसद के सुरेश ने कहा कि इस बिल के पारित होने से इन पांच संस्थानों के छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा देने का अधिकार मिलेगा जो स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने देश में उच्च शिक्षा वाले अनेक संस्थानों में अनुसूचित जाति के छात्रों के कथित उत्पीडन की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने संस्थानों में दलित बच्चों को शोषण से बचाने के लिए मजबूत तंत्र बनाने का सुझाव दिया।
भाजपा के रामकृपाल यादव ने कहा कि बिहार के बच्चे प्रतिभा के मामले में देश-विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं और उनके राज्य में ऐसे और भी संस्थान खोले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे 11 करोड़ आबादी वाले राज्य में एक संस्थान से काम नहीं चलेगा। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिये जाने की मांग की। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि आईआईआईटी संस्थानों में शिक्षा का स्तर आईआईटी जैसे संस्थानों के समकक्ष बनाने की जरूरत है।