सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद व केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए सभी तरह के टैक्स वसूली को छह अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ केसमक्ष इस संबंध में इलाहाबाद व केरल हाईकोर्ट केद्वारा दिए गए फैसले का उल्लेख किया।
मेहता ने कहा कि करों के डिजिटल भुगतान की पहले से ही व्यवस्था है, ऐसे में हाईकोर्ट को ऐसा आदेश ही नहीं पारित नहीं करना चाहिए था। पीठ ने केंद्र सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।
साथ ही पीठ ने इस संबंध में अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मेहता ने यह भी कहा कि जीएसटी के तौर पर वसूल की जाने वाली रकम का इस्तेमाल लोगों को वेतन देने में होता है। हाईकोर्ट का यह आदेश से इस स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि यह अधिकार के बंटवारे के सिद्धांत का उल्लंघन है। केंद्र ने कहा है कि हाईकोर्ट के अधिकारक्षेत्र के बाहर जाकर आदेश दिया है।