उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल रंग को चर्चा में ला दिया है। चाहे वो लाल टोपी हो या फिर लाल झंडा, दोनों ही भाजपा के निशाने पर शुरु से रहे हैं। वामपंथी पार्टियां बेशक आज के दौर में मुख्य धारा की राजनीति के हाशिये पर दिखती हों, लेकिन उनका दावा है कि दरअसल भाजपा को लाल रंग से डर लगता है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव और अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव अतुल अंजान कहते हैं कि किसान आंदोलन के दौरान जमीनी स्तर पर जिस तरह लाल झंडे ने हरी टोपी और लाल टोपी की ताकत बढ़ाई और सरकार को कृषि कानून वापस लेने को मजबूर किया, उससे मोदी और योगी सरकार डर गई है। भाजपा अपने भीतरी सर्वे में जनता की नाराज़गी देखकर भी घबराई हुई है।
किसी भी कीमत पर भाजपा को सत्ता से बेदलख करना है
अमर उजाला से बातचीत के दौरान अतुल अंजान कहते हैं कि इस बार किसी भी कीमत पर भाजपा को सत्ता से बेदखल करना है और इसके लिए जमीन तैयार हो चुकी है। वामपंथी पार्टियां अपनी निचली कतारों के साथ समाजवादी पार्टी और उसके साथ जुड़ने वाली पार्टियों के साथ खड़ी हैं और इस गठबंधन को अपनी पूरी ताकत के साथ मजबूत बनाने में लगी हैं। उन्होंने दावा किया कि आज वामपंथी पार्टियां प्रदेश की 70 से 100 विधानसभा सीटों पर अपनी मज़बूत दखल रखती हैं और हर संघर्ष और रैली में लाल झंडों की ताकत देखी जा सकती है।
अतुल अंजान का कहना है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनके बहुत अच्छे रिश्ते हैं और उनसे अक्सर मुलाकात और राजनीतिक चर्चाएं होती रहती हैं। वामपंथी पार्टियों के चुनाव लड़ने और सपा से सीटों के तालमेल के सवाल पर अंजान कहते हैं कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन हम चाहते हैं कि हमें कम से कम 40 सीटें मिलें। अगर सपा की अंदरूनी मजबूरियों या रणनीतिक अड़चनों की वजह से अगर गठबंधन नहीं भी होता तो हमारी कोशिश है कि सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई-एमएल मिलकर लगभग सौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारें। लेकिन हमारी कोशिश है कि गठबंधन बने, कोई न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय हो और मिलकर भाजपा को सत्ता से हटाएं।
लाल टोपी और लाल झंडा मिल जाएंगे तो उत्तर प्रदेश का भाग्य बदलेगा
अतुल अंजान कहते हैं कि अगर लाल टोपी और लाल झंडा मिल जाएंगे तो उत्तर प्रदेश का भाग्य बदलेगा और अगर नहीं होंगे तो शंकाओं का वातावरण बनेगा। अखिलेश यादव को पता है कि लाल झंडे की ताकत क्या है। लखनऊ के ला-मार्टिनियर कालेज ग्राउंड की विशाल रैली उन्हें याद होगी जिसमें सिर्फ लाल ही झंडे नजर आ रहे थे। हम उन्हें समझा ही सकते हैं, लेकिन हम किसी के आगे दया की भीख नहीं मांगने जा रहे। अगर वो समझ जाएंगे तो मुख्यमंत्री बन जाएंगे।
वामपंथियों की चुनावी तैयारियों के बारे में उनका कहना है कि हमने किसान आंदोलन को लेकर प्रदेश के गांव गांव में अभियान चलाए, किसानों की तमाम रैलियों और संघर्ष में लाल झंडे ही दिखे तभी मोदी सरकार ने कह दिया था कि इस आंदोलन के पीछे कम्युनिस्ट और कांग्रेसी हैं और कानून किसी भी कीमत पर वापस नहीं होंगे। आखिरकार उन्हें वापस भी लेना पड़ा और माफी भी मांगनी पड़ी। हमारी ट्रेड यूनियन, किसान संगठन गांव गांव में लोगों को इस सरकार की गलत नीतियों, महंगाई, बेरोज़गारी और तमाम मुद्दों को लेकर जागरूक करती रही है और इसी का नतीजा है कि भाजपा इस बार घबराई हुई है।
हमारी गलतियों का ही नतीजा था कि भाजपा की 13 दिन की सरकार बनी थी
उन्होंने बताया कि राजनीति में पिछली गलतियों से सीखना चाहिए। हमारी गलतियों का ही नतीजा था कि सबसे पहले भाजपा की 13 दिन की सरकार बनी, फिर वाजपेयी सरकार बन गई। उनका कहना है कि हमें समझना होगा कि अब भाजपा पहले वाली भाजपा नहीं है, आज भाजपा यूपी का चुनाव 20 हजार करोड़ खर्च करके लड़ेगी। ज़मीनी रिपोर्ट उनके खिलाफ है और वो बहुत घबराए हुए हैं। पहले वो जातिवाद के मुद्दे पर लड़ने की रणनीति बना रहे थे, लेकिन अब उन्हें लगने लगा है कि तीव्र हिंदुत्व के मुद्दे पर ही उनकी वापसी हो सकती है। ऐसे में विपक्ष को बहुत सोच समझ कर अपनी रणनीति बनानी चाहिए, मजबूत गठबंधन बनाना चाहिए और सत्ता विरोधी जनता की नाराजगी को वोट में तब्दील करना चाहिए।