आरएसएस नेता के मुताबिक, संघ मानता है कि देश की अखंडता के लिए समाज के सभी वर्गों को आपस में जोड़ने वाला एक तंत्र होना चाहिए तभी देश को अखंड रखा जा सकता है। उसे लग रहा है कि हिंदुत्व इसी तंत्र का काम कर सकता है। लेकिन इसके लिए हिंदुत्व की ऐसी विचाऱधारा से सबको जोड़ना होगा जिसमें समाज के सभी वर्ग अपनी मूल सोच को सम्मान देते हुए भी अपने आपको जोड़ सकें। संघ इसी दृष्टि पर काम कर रहा है।
अगर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बार-बार मुस्लिम समुदाय को हिंदुत्व से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं तो इसके पीछे मंतव्य यही है कि वे (मुस्लिम) अपने आपको इस संस्कृति के मूल के साथ जोड़ सकें, जिससे देश की अखंडता सुरक्षित रखी जा सके। इसमें मुस्लिमों के साथ-साथ समाज के अन्य वर्ग भी शामिल हैं।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अमर उजाला को बताया कि 3 अप्रैल 2021 तक अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए लगभग 3500 करोड़ की समर्पण निधि (चंदा) एकत्र हो चुकी है। देश के 6.73 लाख गांवों में से 5.37 लाख गांवों तक पहुंचकर विहिप कार्यकर्ताओं ने समर्पण अभियान को आगे बढ़ाया।
15 जनवरी से 27 फरवरी 2021 तक चले इस समर्पण अभियान में विहिप ने देश के 12.70 करोड़ परिवारों तक पहुंच बनाई और चंदा एकत्र किया। इन परिवारों के 65 करोड़ लोगों ने इस अभियान में अपना योगदान दिया। इस अभियान में विहिप के 20.21 लाख कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिसमें 1.87 लाख महिलाएं भी शामिल रहीं। इसके लिए विहिप कार्यकर्ताओं की 1.75 लाख टोलियां बनाई गई थीं।
100 रुपये के 7.10 करोड़ कूपन काटे गए
समर्पण अभियान में सबसे ज्यादा 100 रूपये मूल्य के 7.10 करोड़ कूपन काटे गए। इसके अलावा 10 रूपये मूल्य के 4.5 करोड़ कूपन और 1000 रूपये मूल्य के 80 लाख कूपन काटे गए। इसके अलावा 30 लाख कूपन अलग-अलग मूल्य के काटे गए।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की 4200 शाखाओं में धन जमा किया गया। इन शाखाओं में धन जमा करने के लिए 38,185 विशेष टोली प्रमुख बनाए गए थे। धनुष ऐप बनाकर इस पर चेक द्वारा प्राप्त पूरे योगदान की जानकारी रखी गई।
विश्व का सबसे बड़ा अभियान
विनोद बंसल ने कहा कि राम मंदिर के लिए योगदान जुटाना विश्व का सबसे बड़ा समर्पण अभियान है। इसकी व्यापकता और करोड़ों लोगों के विश्वास को देखने के बाद भी कुछ लोग इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिंह खड़ा करने की कोशिश करते हैं। यह उनकी संकुचित और कपटपूर्ण विचारधारा का प्रमाण है। पूरे समर्पण अभियान और रामभक्तों के एक-एक पैसे के सदुपयोग को लेकर श्रीराममंदिर ट्रस्ट पूरी तरह सजग है।