अध्ययन में कहा गया है कि 22 वर्षीय एक प्रतिरक्षात्मक पुरुष, जिसका कोई महत्वपूर्ण चिकित्सा इतिहास नहीं रहा, उसे बेहोशी की हालत में केरल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आईसीएमआर के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में मंकीपॉक्स का पहला घातक मामला असामान्य अभिव्यक्तियों वाले लोगों में वायरल बीमारी का निदान करने के लिए संदेह के एक उच्च सूचकांक के महत्व पर प्रकाश डालता है। 'केरल इंडिया 2022 से मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण का एक घातक मामला' अध्ययन प्री-प्रिंट के रूप में प्रकाशित किया गया है और इसकी समीक्षा नहीं की गई है। भारत में अब तक मंकीपॉक्स के 11 मामले सामने आए हैं जिनमें पांच केरल से और छह दिल्ली से हैं।
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बीमारी के बाद यूएई से लौटा था 22 वर्षीय युवक
अध्ययन में कहा गया है कि 22 वर्षीय एक प्रतिरक्षात्मक पुरुष, जिसका कोई महत्वपूर्ण चिकित्सा इतिहास नहीं रहा, उसे बेहोशी की हालत में केरल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रोगी को 15 जुलाई को बुखार, सिरदर्द हुआ जबकि संयुक्त अरब अमीरात में उसे मवाद के साथ लिम्फैडेनोपैथी हुआ था, जिसके लिए उसने 19 जुलाई को इलाज करवाया। वह इलाज के बाद आंशिक रूप से ठीक हो गया था और 21 जुलाई, 2022 को संयुक्त अरब अमीरात से केरल लौट आया था। उसने 23 जुलाई को फुटबॉल खेला जिसके कारण उसकी तबियत बिगड़ी जिसके बाद उसने 25 जुलाई को केरल में एक सर्जन से परामर्श किया और पता चला कि उसे हिड्राडेनाइटिस सप्पुरुटिवा है।
युवक ने थकान और हल्के बुखार की शिकायत जारी रखी जो लगातार सिरदर्द, सेंसोरियम में बदलाव, भूख न लगना या वजन से जुड़ा नहीं थी। 26 जुलाई की शाम को उसे बुखार आया और उसके बाद टॉनिक क्लोनिक दौरा पड़ा। एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और सिफलिस के लिए सीरोलॉजिकल परीक्षण नेगेटिव थे। उसे सामान्य यकृत और गुर्दे स जुड़ा न्यूट्रोफिलिक ल्यूकोसाइटोसिस था। अध्ययन में कहा गया है कि अगले 48 घंटों में उसे कोगुलोपैथी और तीव्र गुर्दे का दर्द शुरू हुआ।
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28 जुलाई को रोगी का सेरेब्रल एडिमा बिगड़ा और उसका इलाज किया गया। एंटी-सेरेब्रल एडिमा उपायों के बावजूद उसमें ब्रेनस्टेम डिसफंक्शन हुआ और 30 जुलाई को उसकी मृत्यु हो गई। रोगी की मृत्यु से ठीक पहले उसके रिश्तेदारों को यूएई से एक टेस्ट रिपोर्ट मिली जिससे पता चला कि वह यूएई में एमपीएक्सवी पॉजिटिव पाया गया था। यह भारत में रिपोर्ट किए गए मंकीपॉक्स का पहला घातक मामला था। यह मामला उन लोगों में एमपीएक्सवी का निदान करने के लिए संदेह के एक उच्च सूचकांक को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो असामान्य लक्षण के साथ नजर आते हैं।