केरल में सत्तारूढ माकपा ने दो महिलाओं की बलि की कड़ी निंदा की है। उसने अपनी ही सरकार से मांग की है वह अंधविश्वास व जादूटोना रोकने के लिए कठोर कानून बनाएं और मौजूदा कानून का सख्ती से पालन कराए।
माकपा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि बलि की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। ऐसी घटनाएं सिर्फ कानून से नहीं बल्कि जनांदोलनों और समाज में जागरूकता से ही रोकी जा सकती हैं। पार्टी के राज्य सचिवालय ने यह बयान जारी किया। जादूटोने के चलते दो महिलाओं की नृशंस हत्या की वारदात केरल के पथनमथिट्टा जिले के एलंथुर में हुई है। इसने राज्य में व्याप्त अंधविश्वास का खुलासा कर दिया है। इसने इस बुराई के खिलाफ बड़ी लड़ाई की जरूरत पैदा की है।
अंधविश्वास के चलते देश में 73 हत्याएं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए सत्तारूढ़ वाम दल ने कहा कि पिछले साल देश में सिर्फ अंधविश्वास के चक्कर में 73 हत्याएं हुईं। पार्टी के बयान में कहा गया है कि किसी ने नहीं सोचा होगा कि केरल जैसे राज्य में ऐसी स्थिति पैदा होगी। पार्टी इस घटना की कड़ी निंदा करती है, इसने मानव विवेक को झकझोर दिया। माकपा ने कहा कि मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करने के अलावा जरूरी हो तो एक नए कानून पर भी विचार किया जाना चाहिए।
आरोपी के माकपा से संबंध पर चुप्पी
हालांकि, माकपा के राज्य सचिवालय ने बलि सह हत्याकांड के दूसरे आरोपी भगवल सिंह के सत्तारूढ़ दल से कथित संबंध के विरोधी दलों के आरोप पर चुप्पी साधे रखी। कांग्रेस और भाजपा ने आरोपियों के सक्रिय माकपा कार्यकर्ता होने का आरोप लगाया था और वामपंथी नेताओं और मंत्रियों का समर्थन करते हुए कई फेसबुक पोस्ट डाले थे।
कांग्रेस ने भी कड़े कानून की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने भी अंधविश्वास और रीति-रिवाजों के खतरे को रोकने के लिए एक कड़े कानून की वकालत की है। उन्होंने बुधवार शाम को कहा, हम मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से इसके लिए एक विधेयक पर विचार करने और इसे अगले विधानसभा सत्र में ही पारित करने का आग्रह करेंगे।
एक आरोपी के कट्टरपंथी समूहों से संबंध : भाजपा
उधर, केरल भाजपा के अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप दोहराया है। उन्होंने फिर कहा कि बलि मामले के एक आरोपी के कट्टरपंथी समूहों से संबंध हैं। उसके आतंकवादी संबंधों की जांच होनी चाहिए।