बिजली, पानी, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था से परेशान लोगों को अब केंद्र सरकार बताएगी कि आपका शहर रहने लायक है या नहीं। इसके लिये सरकार राष्ट्रीय स्तर पर इंडेक्स तैयार करेगी। इंडेक्स में शीर्ष पर रहने वाला शहर रिहायश के लिए सबसे बेहतर होगा।
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शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारी ने बताया है कि इसका पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने प्रजेंटेशन को मंजूरी दे दी है और मंगलवार को राज्यों के साथ इस पर विचार कियाजाएगा। सिटी लिवेबिलिटी इंडेक्स में 15 श्रेणी में 77 पैरामीटर हैं। मोटे तौर पर इसे सांस्थानिक, सामाजिक, आर्थिक व भौतिक सेवाओं में बांटा गया है। इसमें नागरिक सुविधाओं, छात्र-शिक्षक, डॉक्टर-मरीज अनुपात, पेयजल आपूर्ति, प्रदूषण स्तर, हरित क्षेत्र, सार्वजनकि परिवहन, अपराध दर जैसी बहुत से मानक रखे गये हैं। सूत्रों के मुताबिक ढाई सालों में केंद्र सरकार शहरी ढांचे में बुनियादी बदलाव के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही हैै।
इस तरह मिलेगा अंक
आठ शासकीय पैरामीटर वाले इंस्टीट्यूशनल इंडेक्स को 30 फीसदी अंक मिलेंगे। वहीं, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, सुरक्षा जैसे 19 पैरामीटर वाले सोशल इंडेक्स का हिस्सा 20 फीसदी है। चार पैरामीटर वाले आर्थिक इंडेक्स को 10 फीसदी व बिजली, पानी, स्कूल जैसे 40 पैरामीटर वाले फिजिकल इंडेक्स का हिस्सा 40 फीसदी रखा गया है।
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इंडेक्स में शामिल होने वाली सेवाएं
शिक्षा इंडेक्स: इसमें छात्र-अध्यापक अनुपात, ड्रॉपआउट रेट, डिजिटल एजूकेशन आदि सेवाओं का आकलन होगा।
स्वास्थ्य इंडेक्स: इसमें आपात स्थिति के दौरान इलाज मिलने का औसत समय (मानक 8-10 मिनट), बेड की संख्या (मानक एक हजार पर 2.50), चिकित्सकों की उपलब्धता (मानक 10,000 पर 24.50) आदि शामिल हैं।
विद्युत आपूर्ति इंडेक्स: अंडरग्राउंड वायरिंग (100 फीसदी), अक्षय ऊर्जा (10 फीसदी ), ग्रीन बिल्डिंग, प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत आदि शामिल हैं।
जलापूर्ति इंडेक्स: हर घर में पानी की सप्लाई। 135 ली प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता। 100 फीसदी पेयजल।
सैनिटेशन इंडेक्स: खराब जल प्रबंधन। सीवेज नेटवर्क के साथ टॉयलेट।
परिवहन इंडेक्स: एक किमी के दायरे में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा। प्रति व्यक्ति सार्वजनिक परिवहन की सुविधा। कुल सड़क के 50 फीसदी पर साइकिल ट्रैक। 75 फीसदी इंटरसेक्शन व इंटरचेंज पर ट्रैफिक सर्विलांस सिस्टम। पार्किंग और पेडस्ट्रियल क्रॉसिंग व फुटपाथ।
देश के प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता में हुआ सुधार
ब्यूरो/ अमर उजाला, दिल्ली। उत्तर भारत में हवा चलते ही मौसम की फिजा बदल गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक सभी प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है। हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और यूपी के लखनऊ, वाराणसी और आगरा के अलावा राष्ट्रीय राजधानी में भी वायु प्रदूषण में सुधार हुआ है। 19 से 25 फरवरी तक वायु गुणवत्ता बीते हफ्ते के मुकाबले बेहतर रही है।
बीते सप्ताह हवा की गति मंद पड़ते ही राष्ट्रीय राजधानी समेत यूपी व अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव दिखा था। जबकि इस पूरे हफ्ते महज एक या दो दिन ही कुछ शहरों में बेहद खराब हवा दर्ज की गई। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट के रिसर्च फेलो विवेक भट्टाचार्य ने कहा कि नवंबर से स्थिति में काफी सुधार हुआ है। एक तो ठंड और कोहरा काफी कम हो गया है। वहीं हवा की रफ्तार भी बेहतर है। ऐसे में प्रदूषण वातावरण में रुक नहीं रहा। दिल्ली व उसके पड़ोसी राज्यों में पुआल जलाने व फसलों के जलाने का भी मौसम नहीं है। ऐसे में स्थिति बेहतर जरूर हुई है। हमें इसी स्थिति को बनाए रखना होगा। मौसम पर निर्भरता कम करनी होगी।
25 फरवरी को बीते 24 घंटों में दर्ज किए गए वायु गुणवत्ता के आंकड़े
सीपीसीबी के मुताबिक 25 फरवरी को बीते 24 घंटों में दर्ज किए गए वायु गुणवत्ता के आंकड़े -
स्थान वायु गुणवत्ता
आगरा 96 (संतोषजनक)
दिल्ली 207 (मॉडरेट टू पुअर)
फरीदाबाद 123 (सामान्य)
लखनऊ 219 (मॉडरेट टू पुअर)
गुरुग्राम 41 ( अच्छी)
रोहतक 99 (संतोषजनक)
जयपुर 57 (संतोषजनक)
कोलकाता 94 (संतोषजनक)
नोट : वायु गुणवत्ता यदि 101 से 200 के स्तर तक मौजूद है तो स्थिति सामान्य समझी जाएगी। वहीं 201 से 300 के स्तर तक वायु गुणवत्ता खराब यानी मॉडरेट टू पुअर और 301 से 400 बेहद खराब व 401 से 500 की स्थिति गंभीर वायु गुणवत्ता की श्रेणी में मानी जाएगी।