कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप व तीसरी लहर की आशंका से बढ़ती चिंताओं के बीच स्वास्थ्य मामलों पर बनी संसद की स्थायी समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह भारतीयों में बूस्टर डोज के उपयोग व प्रभाव पर जांच व अध्ययन करवाए।
विशेषज्ञाें की राय : बूस्टर से बेहतर होगा नागरिकों की दो डोज पूरी करवाएं
कोविड-19 टीकों की बूस्टर डोज पर विचार करने के बजाय सभी लोगों को टीके की दो डोज देने पर ध्यान देना चाहिए। इससे महामारी से बचाव में ज्यादा मदद मिलेगी। यह दावा वैज्ञानिकों ने ऐसे समय में किया है जब वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से तीसरी लहर की आशंका जताई गई है। बचाव के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर बूस्टर डोज देने की विभिन्न संस्थाएं, राज्य व वर्ग सिफारिश कर रहे हैं। जानिए इस पूरे मुद्दे के पक्ष और पहलू...
ओमिक्रॉन को देखते हुए नहीं बने थे टीके
डॉ. विनीता बल, इम्यूनोलॉजिस्ट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च का कहना है कि टीके पुराने वायरस पर आधारित हैं, डेल्टा या ओमिक्रॉन को देखते हुए नहीं बने, तब यह वेरिएंट थे ही नहीं। इनके बूस्टर से ओमिक्रॉन पर प्रभाव होगा या नहीं, हमें नहीं पता। हमारा ध्यान टीकाकरण के पात्र लोगों को पूरे डोज देने पर होना चाहिए।
मास्क पहनो, फिर जो वेरिएंट आए, बचे रहोगे
सत्यजीत रथ, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, दिल्ली का कहना है कि हमें यह भी पता नहीं है कि क्या बूस्टर डोज का प्रभाव भी है? और किस टीके का असर कब तक रहता है? इससे तो अच्छा होगा कि सरकार नागरिकों को अच्छे स्तर के मास्क मुहैया करवाए। इन्हें पहनने के लिए सख्ती करे।
कोरोना से मौतों का असली आंकड़ा जारी करे सरकार : कांग्रेस
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कोरोना से मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाते हुए ऑनलाइन अभियान ‘स्पीक अप फॉर कोविड न्याय’ शुरू किया। उन्होंने सरकार से महामारी में मारे लोगों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने और मौत के असली आंकड़ा जारी करने को भी कहा।