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UAPA: क्या JKDFP को गैरकानूनी संगठन मानने के कारण पर्याप्त? MHA के कदम को लेकर किया गया न्यायाधिकरण गठन

Tue, 24 Oct 2023 06:48 PM IST
ज्योति भास्कर UAPA: क्या JKDFP को गैरकानूनी संगठन मानने के कारण पर्याप्त? MHA के कदम को लेकर किया गया न्यायाधिकरण गठन

सार

गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के एक संगठन की गतिविधियों को आपत्तिजनक मानते हुए इसे गैरकानूनी करार दिया है। सरकार का फैसला UAPA कानून के तहत लिया गया है। संगठन को गैरकानूनी मानने के कारणों की पड़ताल के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने एक गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) न्यायाधिकरण का गठन किया है। सरकार का फैसला जम्मू कश्मीर के एक संगठन के लिहाज से बेहद अहम है क्योंकि करीब दो हफ्ते पहले गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के एक संगठन- JKDFP को गैरकानूनी करार दिया। संगठन की गतिविधियों को देश के कानून के खिलाफ और आपत्तिजनक मानते हुए सरकार ने UAPA कानून के तहत कार्रवाई की। अब संगठन को गैरकानूनी मानने के पर्याप्त कारण हैं या नहीं? इस सवाल पर अंतिम फैसले के लिए सरकार ने न्यायाधिकरण का गठन कर दिया है।
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गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज को ट्रिब्यूनल में शामिल किया
न्यायाधिकरण के गठन को लेकर गृह मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में कहा गया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सचिन दत्ता उस न्यायाधिकरण में शामिल हैं, जिसे जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (जेकेडीएफपी) के भविष्य पर फैसला लेना है।

देशविरोधी हरकतों के कारण UAPA के तहत प्रतिबंध
अधिसूचना में कहा गया है कि जस्टिस सचिन दत्ता का न्यायाधिकरण यह फैसला करेगा कि क्या जम्मू और कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (जेकेडीएफपी) को गैरकानूनी संघ घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं? देशविरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के मकसद से जम्मू-कश्मीर के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी गृह मंत्रालय पहले भी कई संगठनों को बैन कर चुका है।
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गृह मंत्रालय ने अक्तूबर के पहले हफ्ते में लिया एक्शन
सरकार ने कहा, गैरकानूनी संघ घोषित करने के पर्याप्त कारणों के आधार पर UAPA कानून के तहत गृह मंत्रालय ने 5 अक्टूबर, 2023 को जेकेडीएफपी को एक गैरकानूनी संघ घोषित किया था। बता दें कि सरकार गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) कानून के तहत ऐसे संगठनों पर कार्रवाई करती है, जिनकी गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हों या देश के खिलाफ षड्यंत्र रचने की आशंका हो। देश विरोधी संगठनों पर नकेल कसने के लिए 56 साल पुराने इस कानून के तहत गृह मंत्रालय खुफिया रिपोर्ट्स और पुलिस प्रशासन के आकलन के आधार पर सख्त कार्रवाई करता है।
गृह मंत्रालय की ओर से गठित न्यायाधिकरण में जस्टिस सचिन दत्ता एकमात्र न्यायाधीश होंगे। UAPA कानून के तहत ट्रिब्यूनल JKDFP के भविष्य का फैसला करेगी। (न्यायमूर्ति की फोटो साभार-delhihighcourt.nic.in)
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